अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कश्मीरी छात्रों की पहचान आसान काम नहीं है। खुफिया विभाग ही नहीं बल्कि एएमयू प्रॉक्टोरियल टीम का नेटवर्क भी इनके बीच बेहद कमजोर है। आतंकी मन्नान वानी के मारे जाने के बाद नमाज-ए-जनाजा को लेकर हुए विवाद में प्रॉक्टर ऑफिस द्वारा कई वैसे लोगों को नोटिस दे दिया गया था जो सालों पहले पढ़ाई पूरी कर चले गए थे। उस समय प्रॉक्टोरियल टीम की बहुत किरकिरी हुई थी। यहीं कारण है कि इस बार प्रॉक्टोरियल टीम के सदस्य फूंक-फूंक कर कदम उठा रहे हैं।
बृहस्पतिवार को एएमयू में प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं के फोटो, वीडियो के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज आदि अधिकारियों के पास मौजूद हैं। लेकिन 30 घंटे बीत जाने के बाद मात्र चार छात्रों की पहचान हो सकी है। इसमें एक छात्र नेता हैं जो कश्मीर के नहीं हैं। दरअसल कैंपस में कश्मीर के छात्र कुछ अलग अंदाज में रहते हैं।
एलआईयू के कर्मचारी भी कम ही छात्रों को पहचानते हैं। अक्टूबर 2018 में एएमयू के पूर्व छात्र से आतंकी बने मन्नान वानी को जवानों ने मार गिराया था। उसके नमाज-ए-जनाजे को लेकर एएमयू में काफी हंगामा हुआ था। उस समय प्रॉक्टर ऑफिस द्वारा वैसे लोगों को नोटिस जारी कर दिया गया था जो एएमयू के छात्र थे ही नहीं। इसकी वजह से प्रॉक्टोरियल टीम की काफी फजीहत हुई थी।
अतीत के कड़वे अनुभव को ध्यान में रखते हुए प्रॉक्टोरियल टीम के सदस्य सावधानी से छात्रों को चिन्हित कर रहे हैं। विभागीय लोगों को फोटो दिखाकर जानकारी जुटाई जा रही है। प्रॉक्टोरियल टीम को यह भी सूचना मिल रही है कि एएमयू के विभिन्न संकायों के साथ-साथ कश्मीर मूल की वीमेंस कॉलेज की छात्राएं भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई थी। कई छात्रा नकाब पहनी थी।
आपत्तिजनक बयान व नारों पर चुप्पी
विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ कश्मीरी छात्रों ने आपत्तिजनक बोल बोले थे और नारे लगाए थे। इसमें छात्राएं भी शामिल थीं। हालांकि इसको लेकर अभी एएमयू के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।