विधायकों के इस खेमे के विपरीत भाजपा का ही दूसरा खेमा डैमेज कंट्रोल के प्रयास में लगा रहा। खेमे से जुड़े कुछ लोग पिछले दिनों लखनऊ तक गए। वहां उन्होंने नगर निगम से जुड़े मुद्दे सीएम के समक्ष भी रखे और अंदरखाने नगर आयुक्त को लेकर पैरोकारी भी की। मगर महिला विधायक द्वारा बताए गए सच पर प्रदेश स्तर से अन्य जगह से फीडबैक लिया गया। इसके बाद यह बदलाव किया गया है।
और भी अफसर भाजपाइयों के निशाने पर
जिले में और भी अफसर भाजपाइयों के निशाने पर हैं, जिसमें मामू भांजा प्रकरण में गैर समुदाय के युवक की मौत के बाद व्यापारी पक्ष पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजने के मामले में पुलिस के अधिकारियों से जुड़ा मुद्दा प्रमुख है। शहर व जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग से अधिकारियों का मुद्दा खास है। वहीं, बिजली संकट पर भी कुछ अधिकारियों को रडार पर लिया हुआ है। इसके संबंध में भी कुछ परिणाम आने वाले समय में देखने को मिलेंगे।
मैं इस विषय में इतना ही कहना चाहूंगी कि जो हकीकत शहर की समस्याओं की है। वही मुख्यमंत्री को बताई थी। उन्होंने मुझे भरोसा दिया। बस उसी के क्रम में यह बदलाव हुआ है। - मुक्ता संजीव राजा, विधायक शहर क्षेत्र
नगर निगम द्वारा समस्याओं के स्थायी समाधान को लेकर बड़ी कार्ययोजना नहीं बनाई। चूंकि जलभराव, पेयजल संकट आदि को लेकर शहर जूझता रहता है। यही बातें शासन में रखी गई थीं।- अनिल पाराशर, विधायक कोल क्षेत्र