न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के एलएलबी और बीएएलएलबी की अंतिम सत्र का परीक्षा परिणाम जारी हो चुका है। अलीगढ़ जिले के अधिकांश बच्चे फेल हो गए हैं। इससे हड़कंप मचा हुआ है। छात्रों और शिक्षकों ने इसका ठीकरा ओमआर शीट पर फोड़ा है। उनका कहना है कि पहली बार ओएमआर शीट पर परीक्षा हुई, वह भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह। कई बच्चों ने ओएमआर शीट गलत भर दी थी। वहीं, औटा अध्यक्ष डॉ. ओमवीर सिंह का कहना है कि परीक्षा में करीब 90 प्रतिशत बच्चे फेल हो गए हैं, अब दोबारा प्रश्नोत्तर के आधार पर परीक्षा कराने का प्रयास करेंगे, जिससे अधिक से अधिक छात्र पास हो सकें।
आगरा विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को एलएलबी और बीएलएलबी की अंतिम सत्र का परीक्षा परिणाम जारी किया था। इस संबंध में डीएस कालेज के विधि विभाग के अध्यक्ष हरीश शर्मा ने बताया कि सूचना मिली है कि अधिकांश बच्चे विधि की अंतिम वर्ष की परीक्षा में फेल हो गए हैं। ऐसे में यह आकलन का विषय है कि बच्चे फेल क्यों हुए। पहली बार आयोजित ओएमआर शीट पर क्या बच्चे सही जबाव नहीं दे सके या ओएमआर शीट गलत भरी।
बता दें कि फेल होने की सूचना जैसे जैसे विभिन्न कालेजों के शिक्षकों को मिली, वैसे ही उनके माथे पर चिंता की लकीरें देखने को मिलीं। शिक्षक दिन भर इस पर चर्चा करते रहे। कुछ शिक्षकों ने दबी जुबान में कहा कि बच्चों ने विषयों की तैयारी की थी, लेकिन वह बहु विकल्पीय परीक्षा के लिए तैयार नहीं थे। छात्र नेता अमित गोस्वामी ने बताया कि ओएमआर शीट पर फेल होने की वजह को लेकर आगरा विवि कुलपति से मिला जाएगा। डीएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हेम प्रकाश के मुताबिक, जिले में सात विधि कॉलेज हैं।
औटा अध्यक्ष डॉ. ओमवीर सिंह ने कहा कि जिले से करीब 400-500 बच्चे परीक्षा में बैठे थे। अधिकतम छात्र छात्राएं तीन विषयों में फेल हैं। फेल होने का कारण ओएमआर शीट है। ओएमआर शीट के अलावा प्रश्नपत्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह देना भी है, क्योंकि जब बच्चे प्रश्नों का उत्तर देते हैं। वह भले ही सही भाव नहीं बता पाएं, लेकिन विषय की जानकारी रखते हैं तो उत्तर देते हैं। इसी का सही मूल्यांकन कर शिक्षक उन्हें नंबर देते हैं। हम प्रयास करेंगे कि इन विषयों के री एग्जाम प्रश्नोत्तर के माध्यम से हों।