क्वार्सी क्षेत्र की संजय गांधी कॉलोनी में वर्ष 2004 में महिला और उसके परिचित युवक की हत्या में दो आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह फैसला जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत से सुनाया गया है। इस हत्या में इन दोनों के बीच अवैध संबंधों का शक परिवार के लोगों को था। इसी शक के आधार पर इन दोनों की हत्या की गई थी।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता डीजीसी फौजदारी धीरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार, घटना 30 जनवरी 2004 की है। मुकदमा 31 जनवरी की सुबह संजय गांधी कॉलोनी क्वार्सी के नरेंद्र गर्ग के मकान में किराये पर मां के साथ रहने वाली रूबी ने दर्ज कराया था। मुकदमे में आरोप है कि वह अपनी मां, भाई प्रमोद संग रहती थी।
उसकी मां घरों में चौका-बर्तन करती थी। घटना से कुछ दिन पहले उसकी विवाहित बहन नीलम भी यहां आई हुई थी। वाकये वाली रात वह खुद छत पर सोयी हुई थी, जबकि नीचे उसकी मां, बहन, भाई के अलावा मां के पुराने परिचित बेगमबाग के रानू गौतम सोये हुए थे। सुबह छह बजे जब वह नीचे पहुंची तो कमरे में रानू गौतम की लाश पड़ी थी और दूसरे कमरे में उसकी मां सावित्री देवी की लाश पड़ी थी। दोनों की चाकुओं से गोदकर हत्या की गई थी।
आरोप है कि उसके मामा भानौली लोधा के सुधीर, उनके चचेरे भाई मुरारी व खुद रूबी के चाचा भमोरी खुर्द दादों के केशव देव ने पिछले दिनों उसकी मां सावित्री देवी को यह धमकी दी थी कि वह रानू गौतम के साथ रहना छोड़ दे। आरोपियों को मां व रानू के बीच अवैध संबंधों का शक था।
इसी शक के आधार पर यह दोनों हत्याएं की गई हैं। पुलिस की विवेचना में तीनों नामजदों के अलावा एक अन्य अमरपाल उर्फ पिंकू निवासी मदापुर बरला हाल निवासी गुरुद्वारा रोड छर्रा अड्डा का नाम प्रकाश में आया। सत्र परीक्षण के दौरान मुरारी की 13 मई 2019 को मौत हो गई, जबकि सुधीर के लंबे समय से फरार होने के कारण उसकी पत्रावली वर्ष 2013 में अलग कर दी गई थी।
अब अदालत में केशव देव और पिंकू उर्फ अमरपाल के खिलाफ गवाही व साक्ष्य पेश किए गए। कुल दस गवाह पेश किए गए। रानू गौतम के भाई की गवाही व अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी पाया गया और उम्रकैद व 23-23 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।
मृतका की बेटी मुकरी मामा-चाचा के खिलाफ गवाही से
डीजीसी धीरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार, गवाही के दौरान मुकदमा दर्ज कराने रूबी मुकर गई। उसने कहा कि न तो उसने मुकदमा दर्ज कराया और न ही ऐसा आरोप लगाया। यह मुकदमा तो उसके मकान स्वामी ने दर्ज कराया था। उसने तो सिर्फ हस्ताक्षर किए थे। इसके चलते उसे पक्षद्रोही घोषित किया गया, जबकि रानू के भाई ने अपनी गवाही में कहा कि उसका भाई घर से शाम को खाना खाने के बाद टहलने निकला था।
जब देर रात तक नहीं लौटा तो वह उसे तलाशते हुए सावित्री के घर पहुंचे, क्योंकि उसका वहां अक्सर आना जाना था। उसी दौरान उसने चारों आरोपियों को रानू व सावित्री की हत्या करते देखा। रात में दहशत के चलते वह पुलिस को नहीं बता सका। अगले दिन उसने तहरीर के अनुसार गवाही दी। बाद में चौथे आरोपी को भी पहचानकर पुलिस को जानकारी दी। इस आधार पर यह सजा हुई है।