डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर में अहम भूमिका अदा करने वाले बहुप्रतीक्षित अलीगढ़-कानपुर जीटी रोड को फोर लेन हाईवे बनाने का काम जल्द ही शुरू होगा। इसके लिए भारत सरकार की ओर से जमीन अधिग्रहण करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है।
तहसील कोल के गांव बोनेर, खानगढ़ी, पनैठी, जुल्लूपुर सिरोह, जसरथपुर, रोहिना सिंहपुर, बझेड़ा, खेड़ा नारायन सिंह, नानऊ, अकराबाद, टुआमई, कीरतपुर और लधौआ सहित गोपी गांव की लगभग साढ़े 12 हजार हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इसमें अधिकांश जमीन निजी है, जिसमें खेती हो रही है। इसके अलावा चकरोड, आवासीय और व्यवसायिक जमीनें भी हैं। भारत सरकार के उप सचिव राकेश गुप्ता ने इसका सरकारी गजट जारी किया है।
एनएचएआई के अलीगढ़-कानपुर सेक्शन के अधिकारी ने बताया कि भूमि अधिग्रहण होने के बाद इस फोरलेन हाईवे को पूरा करने में लगभग तीन साल का वक्त लगेगा। वर्ष 2021 तक ये सड़क फोरलेन बनेगी लेकिन इसको कभी भी छह लेन में तब्दील किया जा सकेगा। इस सड़क के बनने के बाद अलीगढ़ से कानपुर का 298 किमी का सफर रोडवेज की बस से लगभग पांच घंटे में पूरा होगा जो वर्तमान में करीब दस घंटे में हो रहा है, क्योंकि ये सिंगल रोड है और कई जगहों पर रेलवे क्रासिंग के कारण घंटों जाम लगा रहता है।
अलीगढ़ से कानपुर वाया जीटी रोड 298 किलोमीटर की दूरी, रोडवेज किराया प्रति सवारी 300 रुपये है। नौ से दस घंटे का सफर।
अलीगढ़ से कानपुर वाया आगरा मुगल रोड 388 किलोमीटर की दूरी, रोडवेज किराया प्रति सवारी 418 रुपये है, नौ से दस घंटे का सफर।
अलीगढ़-कानपुर हाईवे बनने के बाद आगरा से घूम कर नहीं जाना पड़ेगा। 90 किलोमीटर की दूरी, टोल टैक्स और समय बचने का लाभ होगा
डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर का अहम हिस्सा होगा यह हाईवे
21 और 22 फरवरी को यूपी में इन्वेस्टर्स समिट हुई थी। इसमें अलीगढ़-आगरा-कानपुर-झांसी के बीच डिफेंस इंन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर बनाने को मंजूरी मिली है। इस कॉरिडोर में 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश होना है। कानपुर में रक्षा मंत्रालय की छह सरकारी फैक्ट्रियां काम करती हैं। डिफेंस कॉरिडोर बनने के बाद अलीगढ़ के उद्यमी कानपुर के लिए काम कर सकेंगे। अलीगढ़ से कानपुर के बीच जीटी रोड हाईवे इसमें बड़ी भूमिका अदा करेगा। कम भाड़े और कम टोल टैक्स में ही अलीगढ़ कानपुर के बीच माल का आवागमन हो सकेगा और समय भी कम लगेगा। अभी कानपुर जाने के लिए कारोबारी जीटी रोड खस्ताहाल होने से आगरा वाया मुगल रोड कानपुर पहुंचते हैं, जिसमें समय के साथ टोल भी ज्यादा लगता है।