एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर।
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जेएन मेडिकल कॉलेज के जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों को आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी करने के लिए कुलपति ने उन्हें राजी कर लिया है। हालांकि, रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने इन जूनियर डॉक्टरों पर दबाव डालकर उन्हें ड्यूटी के लिए मनाने का आरोप लगाया है। दरअसल, जूनियर डॉक्टरों ने ड्यूटी अवधि बढ़ने से चार मई से भूख हड़ताल पर जाने की धमकी दी थी।
जूनियर डॉक्टरों के भूख हड़ताल पर जाने की धमकी के चलते सोमवार सुबह करीब आठ बजे आइसालेशन वार्ड मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल, मेडिकल सुपरीटेंडेंट सहित आला अधिकारी पहुंच गए, जहां उन्होंने जूनियर डॉक्टरों को समझा-बुझाकर ड्यूटी करने के लिए राजी किया। इस मामले में कुलपति को हस्तक्षेप करना पड़ा। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद हमजा ने कहा कि आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी कर रहे रेजीडेंट डॉक्टरों के मुताबिक उनकी ड्यूटी सात दिन के बजाय 14 कर दी गई है, जो ठीक नहीं है।
इससे उनके कोविड-19 से संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई जूनियर डॉक्टर कोविड-19 पॉजिटिव पाया गया, तो इसकी जिम्मेदारी कुलपति व मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल की होगी। डॉ. हमजा ने कहा कि जब इस संबंध में रजिस्ट्रार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जेएन मेडिकल कॉलेज को उप्र स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से एल-2 कर दिया गया है। इसलिए सात दिन के बजाय डॉक्टरों की ड्यूटी 14 दिन कर दी गई है। डॉ. हमजा ने कहा कि ड्यूटी उन जगहों की गई है, जहां न तो पर्याप्त स्टाफ और न ही मेडिकल कॉलेज है, जबकि यह मेडिकल कॉलेज व तकरीबन 600 रेजीडेंट डॉक्टर हैं। उन्होंने कुलपति से मांग की है कि आइसोलेशन वार्ड में जूनियर डॉक्टर की ड्यूटी के साथ कंसल्टेंट या प्रोफेसर की भी ड्यूटी लगाई जाए, क्योंकि एमसीआई के अनुसार जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर बिना किसी के देखरेख में ट्रेनी का काम नहीं कर सकते हैं।