उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव से पहले उद्यमी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) से संबंधित जरूरी मुद्दे को चुनावी घोषणा पत्र में शामिल कराने के लिए राजनीतिक दलों पर दबाव बनाने लगे हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के पदाधिकारी इस संबंध में प्रमुख राजनीतिक दलों को पत्र लिख रहे हैं।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक अग्रवाल, महासचिव दिनेश गोयल ने इससे संबंधित पत्र जिला शाखा को भी भेजा है। पदाधिकारियों का कहना है कि राजनीतिक दलों को इसकी जानकारी होनी चाहिए कि एमएसएमई को उनसे क्या-क्या अपेक्षा है।
उत्तर प्रदेश न केवल जनसंख्या बल्कि एमएसएमई की संख्या में भी प्रथम स्थान पर है। देश की कुल एमएसएमई की संख्या में उत्तर प्रदेश के एमएसएमई की संख्या 14.20 प्रतिशत है।
प्रदेश में 89.99 लाख एमएसएमई स्थापित हैं, जिसमें 165.26 लाख लोग (मतदाता) कार्य कर रहे हैं। करीब 255.25 लाख परिवारों का भरण पोषण एमएसएमई सेक्टर सीधे तौर पर कर रहा है। इसके अतिरिक्त लाखों लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।
आईआईए सचिव मनीष बंसल ने बताया कि अलीगढ़ के ताला एवं हार्डवेयर उत्पाद को भी प्रोडक्ट लिंक स्कीम में लाया जाए। साथ ही यहां पर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त ईएसआई हॉस्पिटल की व्यवस्था की जाए ताकि काम करने वाले लोगों को जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सके। मनीष बंसल ने बताया कि राजनीतिक दलों को एमएसएमई से संबंधित मुद्दों को चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने के लिए जल्द ही ज्ञापन दिया जाएगा।
ये हैं प्रमुख मांगें ..
- सरकारी विभागों, उपक्रमों व स्वायतशासी निकायों में कुल खरीद का 30 प्रतिशत हिस्सा सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों से खरीदा जाए।
- विभागीय टेंडरों में एमएसएमई के लिए किसी प्रकार की तकनीकी शर्तें न हो एवं सारी खरीद जैम पोर्टल के माध्यम से ही की जाए।
- प्रदेश में एमएसएमई की लीज होल्ड भूमि को फ्री होल्ड किया जाए।
- औद्योगिक परिसंपत्तियों, भवनों पर हाउस टैक्स आवासीय भवनों से कम किया जाए।
- रूफ टॉप सोलर सिस्टम को प्रोत्साहन देने एवं क्लीन एनर्जी के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एमएसएमई को नेट मीटरिंग की सुविधा पुन: बहाल की जाए।
- प्रदेश के त्वरित औद्योगिक विकास के लिए पूर्वांचल एवं गंगा एक्सप्रेस वे पर नए इंडस्ट्रियल क्षेत्र विकसित किए जाएं।
- मंडी शुल्क को शून्य किया जाए।
- उत्तर प्रदेश विधान परिषद में एमएसएमई का प्रतिनिधित्व हो।
- वायु प्रदूषण को कम करने के लिए उद्योगों में पीएनजी को ईंधन के रूप में उपयोग का बढ़ावा दिया जाए।