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अलीगढ़-हाथरस की दलित राजनीति में हलचल

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कौशल कुमार ओझा
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अलीगढ़ एवं हाथरस की दलित राजनीति में इस समय हलचल है। इसकी वजह से भाजपा में अंदर ही अंदर बेचैनी महसूस की जा रही है। हाथरस के सांसद राजवीर दिलेर एवं इगलास विधान सभा के विधायक राजकुमार सहयोगी राजनीति के केंद्र में हैं।
पिछले एक सप्ताह से अलीगढ़ एवं हाथरस के दो जनप्रतिनिधि चर्चा में हैं। चर्चा में आए दोनों जनप्रतिनिधि अनुसूचित जाति से हैं और दोनो का संबंध इगलास से है। 10 अगस्त को हाथरस का एक लेखपाल मिठाई के डब्बे में 50 हजार रुपये लेकर सांसद राजवीर दिलेर के पास पहुंचा था। कथित तौर पर उसका मकसद अपना तबादला रुकवाना था। सांसद ने उसके खिलाफ हसायन थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी। मामला मीडिया में आने के बाद सांसद राजवीर दिलेर अचानक चर्चा में आ गए और उनकी ईमानदारी की तारीफ होने लगी। इसके दो दिन बाद गोंडा थाना में एक कार्यकर्ता को लेकर थानाध्यक्ष अनुज कुमार सैनी एवं इगलास विधान सभा क्षेत्र के विधायक राजकुमार सहयोगी के बीच भिड़ंत हो गई। इस घटना की जांच अभी चल रही है और उसका निष्कर्ष निकलना बाकी है। लेकिन इतना तय है कि गोंडा थाना कांड के बाद राजकुमार सहयोगी का कद कार्यकर्ताओं के बीच काफी बढ़ गया है। कुछ लोगों ने तो यहां कहना तक शुरू कर दिया कि अब प्रदेश के लोगों को पता चल गया होगा कि इगलास की जनता ने एक शेर को चुना है।
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राजनीति के जानकारों का कहना है कि राजवीर दिलेर और राजकुमार सहयोगी भले ही सार्वजनिक रूप से एक नजर आते हैं लेकिन पर्दे के पीछे बड़ी राजनीति चल रही है। 2017 के विधान सभा चुनाव में इगलास से रिकार्ड मतों से राजवीर दिलेर जीते थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में राजवीर दिलेर हाथरस के सांसद चुन लिए गए और विधानसभा से त्यागपत्र देकर लोकसभा में पहुंच गए। लोकसभा में पहुंचने के बावजूद सुरक्षित विधानसभा सीट इगलास से उनका मोहभंग नहीं हुआ है। वह इसे अपनी जड़-जमीन के रूप में देखते हैं। उनकी कोशिश थी कि इगलास से उनके पुत्र दीपक दिलेर या पत्नी रजनी दिलेर में से किसी को विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रत्याशी बनाया जाए।
इसी बीच पार्टी ने पुराने कार्यकर्ता एवं संघ के करीबी राजकुमार सहयोगी को मैदान में उतार दिया। वह अनुसूचित जाति में भी उस वर्ग से आते हैं, जिसमें बसपा सुप्रीमो मायावती की सबसे अच्छी पकड़ है। अभी 2022 विधान सभा चुनाव की चर्चा सार्वजनिक रूप से कोई नहीं कर रहा है लेकिन अंदर ही अंदर उसकी गर्मी जरूर महसूस की जा रही है। दिलेर व सहयोगी के अतिरिक्त अन्य वैसे दलित नेता भी सक्रिय हो गए हैं, जिन्हें दो के झगड़े में तीसरे को फायदा होने की उम्मीद है। हालांकि, सांसद राजवीर दिलेर एवं विधायक राजकुमार सहयोगी किसी तरह की राजनीति से इनकार कर रहे हैं।
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सासंद राजवीर दिलेर कहते हैं कि गोंडा थाना में जो कुछ भी हुआ, वह निंदनीय है। मैं तो पार्टी एवं सहयोगी के साथ हूं। विधायक राजकुमार सहयोगी का कहना है कि इगलास विधानसभा क्षेत्र के लोग उनके साथ हैं। कार्यकर्ताओं के मन से निराशा दूर हुई है और उम्मीद की किरण जगी है। कार्यकर्ता के मान-सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा। सहयोगी कहते हैं कि राजवीर दिलेर हमारे सांसद है। इगलास विधान सभा क्षेत्र उन्हीं के लोकसभा में आता है। उनका साथ मिल रहा है। भाजपा में कार्यकर्ता देवता के समान होते हैं।
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