अलीगढ़ के विशेष न्यायालय ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क की गई 10.74 लाख रुपये की जमीन को मुक्त करने का आदेश दिया है। अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार यादव प्रथम की अदालत ने यह निर्णय सुनाया। अदालत ने जिलाधिकारी के कुर्की और संपत्ति मुक्त करने से इन्कार संबंधी दोनों आदेश निरस्त कर दिए।
यह मामला विकास यादव और उनकी पत्नी सुमन यादव से संबंधित है। सुमन यादव की ओर से दाखिल याचिका को अदालत ने स्वीकार किया। जमीन सुमन यादव के नाम पंजीकृत थी। यह अकराबाद थाना क्षेत्र के गांव तुआमई में स्थित है। खाता संख्या 538 और गाटा संख्या 685 में दर्ज भूमि के 2/3 हिस्से को कुर्क किया गया था। जिलाधिकारी ने 29 अक्तूबर 2022 और 16 नवंबर 2023 को कुर्की के आदेश दिए थे। इन्हीं आदेशों को विशेष न्यायालय में चुनौती दी गई थी। अदालत ने एक अक्तूबर को यह आदेश जारी किया।
याचिका में सुमन यादव ने बताया कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा या गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई लंबित नहीं है। उन्होंने कहा कि जमीन खरीदने के लिए धनराशि उनकी अपनी संपत्तियों को बेचने से मिली थी। वर्ष 2020 में संपत्तियों की बिक्री से उन्हें करीब 22.30 लाख रुपये प्राप्त हुए थे। इसी धनराशि से 12 जनवरी 2021 को यह जमीन खरीदी गई थी।
राज्य सरकार ने तर्क दिया कि जमीन विकास यादव की आपराधिक गतिविधियों से अर्जित धन से खरीदी गई थी। हालांकि, अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष सुमन यादव के पास धन के स्वतंत्र स्रोत होने का खंडन नहीं कर सका। अदालत ने माना कि केवल पति के कथित आपराधिक कृत्यों के आधार पर पत्नी की संपत्ति को अवैध कमाई से अर्जित मानना पर्याप्त नहीं है। संपत्ति कुर्क करने के लिए महज संदेह के बजाय ठोस आधार होना जरूरी है। यह निर्णय दो नवंबर 2026 से प्रभावी होगा, लेकिन अपीलीय अदालत से स्थगन आदेश न होने और सुमन यादव द्वारा शपथपत्र देने पर ही संपत्ति मुक्त की जाएगी।