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अलीगढ़ : हमले के 25 वर्ष पुराने मुकदमे में पूर्व विधायक वीरेश बरी

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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समाजवादी पार्टी के तीन बार के पूर्व विधायक वीरेश यादव को शुक्रवार को एमपी/एमएलए कोर्ट एडीजे-13 की अदालत से 25 वर्ष पुराने हमले के एक मुकदमे में बरी कर दिया गया है। इस मुकदमे में दो अन्य आरोपियों के नाम पुलिस विवेचना में निकाले गए थे। शुक्रवार को अदालत का फैसला आने पर समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
ये घटना 21 नवंबर 1998 की है। जब दादों के गांव रायपुर के दर्शन सिंह की ओर से दादों थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया कि वह तहसील से लौट रहे थे। तभी पूर्व विधायक वीरेश यादव, उनके गनर व एक अन्य साथी ने रास्ता रोककर उन पर हमला कर दिया। इस दौरान यह कहते हुए धमकाया कि तू बहुत भाजपा का समर्थक बनता है। इस मामले में मुकदमे के आधार पर पुलिस ने विवेचना में गनर व दूसरे साथी बुलाकी के नाम निकाल दिए गए।
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अकेले वीरेश यादव के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई। मुकदमे में लंबे समय तक हाजिर न होने पर 26 अप्रैल को इसी वर्ष कुर्की व गिरफ्तारी आदेश जारी किया गया और डीजीपी तक को पत्र लिखा गया। इस पर वीरेश ने 4 मई को कोर्ट में सरेंडर किया। जहां से उन्हें जेल भेजा गया और वह 14 दिन बाद जमानत पर रिहा हुए। मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता चंद्र शेखर दीक्षित ने बताया कि उनकी ओर से न्यायालय में दलील दी गई कि पीड़ित ने अपनी तहरीर व विवेचना में गनर व बुलाकी पर दर्शन के कारतूस छीनने का आरोप लगाया।
बावजूद इसके पुलिस ने उन दोनों के नाम निकाल दिए। बचाव पक्ष ने कहा कि यह मुकदमा राजनीतिक विद्वेष वर्ष दर्ज कराया गया। इसके वादी की भी मौत हो चुकी है। उसके अलावा कोई अन्य साक्ष्य या गवाह अभियोजन की ओर से पेश नहीं किया जा सका। इस आधार पर न्यायालय ने वीरेश यादव को बरी कर दिया गया। एडीजीसी सुधाकर कुलश्रेष्ठ ने भी वीरेश यादव को बरी किए जाने की पुष्टि की है। बता दें कि इसके अलावा एक अन्य मुकदमा इसी अदालत में वीरेश पर लंबित है, जबकि दो मुकदमे निचली अदालत में लंबित हैं।
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रोरावर कांड में तत्कालीन सीओ की गवाही दर्ज
अलीगढ़। महानगर के देहली गेट इलाके के बहुचर्चित रोरावर कांड में शुक्रवार को तत्कालीन सीओ मान सिंह चौहान की गवाही एमपी/एमएलए कोर्ट एडीजे-13 की अदालत में हुई। बता दें कि इस मुकदमे में पूर्व विधायक संजीव राजा सहित 21 आरोपियों पर ट्रायल चल रहा है। अब इस मामले में अगले गवाह को तलब करते हुए तारीख नियत कर दी गई है। ये घटना वर्ष 2003 की है। जब एक शवयात्रा के रास्ते के विवाद को लेकर हुए विवाद के दौरान सांप्रदायिक टकराव और पुलिस से भिड़ंत हो गई थी। घटना के बाद शहर के तीन थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाना पड़ा था। इस मुकदमे का ट्रायल अब अदालत में जारी है। एडीजीसी सुधाकर कुलश्रेष्ठ व पूर्व विधायक संजीव राजा के अधिवक्ता प्रवीन गुप्ता के अनुसार प्रकरण में शुक्रवार को तत्कालीन सीओ व सेवानिवृत्त पीपीएस अधिकारी मान सिंह चौहान के बयान दर्ज किए गए।
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