वन विभाग में पौधरोपण के नाम पर हुए 22 करोड़ से अधिक के घोटाले की जांच के दौरान कंदोली झील से पतवार निकलवाने और झील की खुदाई के नाम पर 1.83 करोड़ 20 हजार रुपये का घोटाला भी सामने आया है। इतनी बड़ी रकम को कागजों में काम दर्शाकर वन संरक्षक वीके मिश्रा के फर्जी हस्ताक्षर करके हड़प लिया गया। इस मामले में वीके मिश्रा ने थाना सिविल लाइंस में पूर्व डीएफओ श्रीधर त्रिपाठी, तत्कालीन वन अधिकारी खैर अंतराम सिंह, वन रक्षक खैर वेदप्रकाश, क्षेत्रीय वनाधिकारी अरविंद कुमार सहित विभाग के उदयवीर सिंह, पीतांबर सिंह और मो. सफी के खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज कराया है।
पुलिस ने अपने स्तर से जांच शुरू कर दी है। इधर, वन विभाग में इस मुकदमे को लेकर खलबली मच गई है। मुकदमे में नामजद आरोपी सोमवार को कार्यालय से नदारद रहे। बताया जा रहा है कि इन सभी को सेवा से बर्खास्त करने की भी तैयारी शासन स्तर से कर ली गई है।
अलीगढ़ मंडल के वन संरक्षक वीके मिश्रा के अनुसार 2018 में शासन स्तर से कंदोली झील की खुदाई और पतवार निकालने की योजना को मंजूरी मिली थी, जिसमें गड़बड़ी कर श्रीधर त्रिपाठी ने अपने अधीनस्तों के साथ मिलकर 25 जनवरी 2019 को कागजों में हुए काम के बिल बनाए और वन संरक्षक के फर्जी हस्ताक्षर कर मुख्य वन संरक्षक कैंपा योजना को प्रेषित कर दिए। इसके बाद उन्होंने बिलों की एवज में मिले क्रमश: 59.75 लाख, 31.90 लाख, 91.65 लाख रुपये की रकम का बंदरबांट अपने साथियों में मिलकर कर लिया। महालेखाकार ऑडिट रिपोर्ट की समीक्षा के दौरान इतना बढ़ा घोटाला पकड़ में आया।
इस घोटाले से संबंधित सभी दस्तावेजों को सील कर शासन को भेज दिया गया है। वीके मिश्रा के अनुसार श्रीधर त्रिपाठी सहित सात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस ने इस मुकदमे की पुष्टि की है।