गांव के लोगों को अब अपने अधिकार या फिर आपसी विवाद के लिए अपने ही गांव की अदालत में न्याय मिलेगा। यूपी के 43वें जिले अलीगढ़ में पहला ग्राम न्यायालय गभाना में शुरु हो गया है। गभाना तहसील में ग्राम न्यायालय के शुभारम्भ पर प्रशासनिक जज विवेक चौधरी, हाईकोर्ट जज जहांगीर जमशेद मुनीर,साधना रानी ठाकुर व जिला जज बब्बू सारंग ने पूजा अर्चना की। ग्राम न्यायाल का फीता काटकर व शिला पट्टिका का अनावरण कर शुभारम्भ किया गया।
प्रशासनिक जज विवेक चौधरी ने कहा कि तहसील क्षेत्र से संबंधित मुकदमों का निस्तारण के लिए अब अलीगढ़ जाने की जरुरत नहीं होगी। ग्राम न्यायालय में दीवानी एवं फौजदारी संबंधित 25 हजार रुपये से कम वाले अथवा दो वर्ष से कम सजा वाले मुकदमे का निस्तारण किया जाएगा। तहसील में ग्राम न्यायालय खुलने से समय की बचत होगी। साथ ही जनता को सस्ता सुलभ त्वरित न्याय मिलेगा। जिला जज बब्बू सारंग ने कहा कि ग्राम न्यायालय में फौजदारी, सिविल के 2900 के लगभग मामले सुने जाएंगे।
ग्राम न्यायालय के काम
- आपसी विवाद को सुलझाना।
- गांव में जाकर वातावरण और व्यवस्था को समझना।
- निष्पक्ष फैसला सुनाना।
- आपसी समझौते से विवाद का निस्तारण करना।
ग्राम न्यायालय की यहां होती है अपील
- ग्राम न्यायालय के आदेश होने के 30 दिनों के अंदर संबंधित जिला न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
- दीवानी मामलों में संबंधित जिला न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
- फौजदारी मामलों में संबंधित सत्र न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
- जिला और सत्र न्यायालयों को ग्राम न्यायालय के आदेश के खिलाफ यदि अपील की जाती है, तो 6 माह के अंदर फैसला देना अनिवार्य है।
ये मौजूद थे
ग्राम न्यायालय के शुभारम्भ के दौरान सीजेएम ऐश्वर्या प्रताप सिंह,सिविल जज संदीप सिंह, एडीजे प्रथम मनोज अग्रवाल, एसीजेएम नरेश कुमार, व्योमा गौड, प्रियांशी राय, सुभा प्रकाश,एसडीएम केबी सिंह, सीओ सुमन कनोजिया,तहसीलदार ऊषा सिंह, नायब तहसीलदार संदीप चौधरी, अजेंद्र तौमर, विनेश कुमार सिंह, बार अध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह, जितेंद्र कुमार सिंह, संजय चौहान, हिम्मत सिंह,सुधींद्र प्रताप सिंह,जेई आरईएस मनोज कुमार, मदन पाल वर्मा, डीके तंवर, अलीगढ़ बार एसो. के अध्यक्ष संतोष वरिष्ठ, अनिल सारस्वत,डॉ. श्याम सुंदर वशिष्ठ, देवेश सिंह, राजेश सारस्वत आदि मौजूद रहे।