आज की जेलों में दिनोंदिन कैदियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। मौजूदा समय में 1100 कैदियों की क्षमता वाली अलीगढ़ की जेल में 4200 से ज्यादा कैदी हैं। कानून व्यवस्था पर अंग्रेजों की पकड़ कह लें अंग्रेजी शासन काल में कैदियों की संख्या कम होती गई। 1845-1849 के दौरान अलीगढ़ की जिला जेल में कैदियों की औसत संख्या 648 थी। इसके पचास साल बाद यानि कि 1895-1899 के दौरान कैदियों की औसत संख्या घटकर 420 रह गई थी। इस काल में भी कैदियों को हुनरमंद बनाने का काम किया जाता था। जेल में रहने के दौरान उन्हें रस्सी की बटाई, कालीन बुनाई और ईंट पथाई का काम सिखाया जाता था।
कन्या भ्रूण हत्या के लिए बदनाम थे जिले के 127 गांव
1870 का अधिनियम संख्या 8 लागू किया गया था। इसमें कन्या भ्रूण हत्या को दंडनीय बनाया गया था। जिले में कन्या भ्रूण हत्या के लिए अंग्रेजी प्रशासन ने 127 गांवों को चिह्नित किया था, जिनमें कन्या भ्रूण हत्या प्रचलन में थी। अंग्रेजों ने साफ तौर पर तो नहीं लिखा लेकिन इस बात का उल्लेख किया कि राजपूतों, जाटों, अहीर और गूजर जातियों संदेह के दायरे में थीं। 1871-72 में अंग्रेजों ने पुरुष-महिला लिंगानुपात जानने के लिए विशेष जनगणना भी कराई थी। कन्या भ्रूण हत्या के मामले में 1885 में गांवों की संख्या घटकर 85 हो गई । जाहिर है कि समय के साथ कन्या भ्रूण हत्या में कमी आती गई। 1890
के बाद तो बहुत कम गांव जिले में ऐसे रह गए जहां से कन्या भ्रूण हत्या कीजानकारी मिली हो।
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स्रोत- अलीगढ़ का गजेटियर (1878-1909)