राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी में कई पीढ़ियों से आ रहे कश्मीरी दुकानदारों को इस बार निराशा हो रही है। दरअसल, फरवरी में ही मौसम लगातार गर्म होता जा रहा है, ऐसे में कश्मीरी शॉल, ऊनी कपड़े आदि की मांग न के बराबर रह गई है। इससे दुकानदारों को खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है।
पिछले दस-ग्यारह महीने देश और दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में रहे। इसके बाद जब परिस्थितियां धीरे-धीरे सामान्य होने की तरफ बढ़ीं तो राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी के आयोजन का रास्ता खुला। इस बार प्रदर्शनी अपने निर्धारित समय से एक महीना देरी से आयोजित हो रही है।
पहलगांव से आए दुकानदार बिलाल कहते हैं कि सबसे बड़ी समस्या फरवरी के मध्य में तापमान के लगातार बढ़ने को लेकर हो रही है। यह ऐसा मौसम नहीं है, जिसमें गर्म कपड़े, शॉल आदि पर उपभोक्ता आकर्षित हों। इसका सीधा असर व्यापार पर पड़ रहा है। खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है।
श्रीनगर से आए समीर कहते हैं कि हमने माल यह सोचकर स्टॉक किया था कि सर्दियों में हमेशा से जिस माल की डिमांड रहती है, इस बार भी ऐसा ही रहेगा। लेकिन ऊनी सामान की मांग में भारी कमी है। इसकी वजह फरवरी के मध्य में तापमान का गर्म होना है। समीर कहते हैं कि यह उनकी तीसरी पीढ़ी है जो नुमाइश में लगातार आ रही है। उनके पास सन 1951 तक की रसीदें हैं। खुद उनको लगातार 9 वर्ष नुमाइश में आते हुए हो गए हैं। लेकिन मौसम का कारोबार पर इस तरह का असर यह पहली बार ही देखने को मिल रहा है।