डीएस कॉलेज में सपा के युवा घेरा का विरोध करते एबीवीपी के प्रदेश मंत्री बलदेव
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डीएस कालेज में मंगलवार को विवेकानंद की जयंती पर समाजवादी पार्टी द्वारा माल्यार्पण करना विवाद की जड़ बन गया। इसके विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने हंगामा काटा और धरना दिया। कार्यकर्ता एफआईआर दर्ज करने पर अड़े रहे। प्राचार्य डॉ. हेमप्रकाश और चीफ प्रॉक्टर मुकेश भारद्वाज के समझाने के बाद एबीवीपी ने 48 घंटे का समय दिया है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आह्वान पर युवा दिवस के उपलक्ष्य में छात्र नेता अर्जुन सिंह भोलू, कौशल दिवाकर, रंजीत चौधरी ने युवा घेरा कार्यक्रम आयोजित कर डीएस कालेज में विवेकानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। यहां छात्रों को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों व सिद्धांतों को बताते हुए पदाधिकारियों ने उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इस दौरान छर्रा विधायक राकेश सिंह भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद एबीवीपी कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और हंगामा करने लगे। प्राचार्य कक्ष के बाहर धरना देकर एफआईआर कराने की मांग की। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने कहा कि बिना अनुमति कालेज में कार्यक्रम आयोजित कर माहौल खराब किया गया है। प्रदेश मंत्री बलदेव चौधरी सीटू ने बताया कि कालेज परिसर पढ़ने के लिए है। न कि पार्टियों के कार्यक्रम करने के लिए। इस दौरान बाहरी तत्वों ने कालेज कैंपस के अंदर नारेबाजी की। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इकट्ठा करने के लिए छात्रों पर दबाव बनाया गया। मना करने पर एक छात्र से मारपीट भी की गई। प्राचार्य से समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। एबीवीपी ने 48 घंटे का समय देकर धरना स्थगित किया है। इस मौके पर प्रांत एग्री विजन प्रमुख जय यादव, मधुर माहेश्वरी, करण आर्य, प्रताप सिंह, अंकुर शर्मा, कुणाल, मनी चौधरी, नितिन चौधरी, जीतू चौधरी आदि मौजूद रहे।
भाजपाइयों को पसंद नहीं है किसी और का राष्ट्रवाद प्रेम
एबीवीपी द्वारा धरना देने और एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर छात्र नेता व सपा नेता अर्जुन सिंह भोलू ने कहा है कि भाजपाइयों को किसी और पार्टी का राष्ट्रवाद प्रेम पसंद नहीं है। वह नहीं चाहते कि राष्ट्रवादी विचारों पर कोई और पार्टी चले। छद्म राष्ट्रवाद से ग्रसित भाजपा विवेकानंद का सम्मान नहीं चाहती है। इसीलिए तो इससे पहले अलहदादपुर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा नहीं लगाने दी गई। अब माल्यार्पण कार्यक्रम को विवादित बनाया जा रहा है। यह एक सोची समझी राजनीति है।