आरटीओ गेट के सामने शनिवार को दिनदाहड़े हुई दुस्साहसिक वारदात किसी फिल्मी सीन से कम नहीं। चारों आरोपी दो बाइकों पर सवार होकर आए और गेट के बायीं ओर बाइकें खड़ी कर दीं। इसके बाद दायीं ओर चाय की दुकान के सामने बैठे भूपेंद्र की ओर हाथों में हथियार लेकर बढ़े। जैसे ही भूपेंद्र से नजर मिली तो एक हमलावर को बस इतना कहते हुए सुना गया कि ऐ भूपेंद्र...बस फिर खुद भूपेंद्र व प्रत्यक्षदर्शियों ने आठ-नौ बार धांय-धांय-धांय की आवाज सुनी। इसके बाद तो वहां हायतौबा-भगदड़ का माहौल बन गया। जिसको जहां जगह मिली, वहां छिपकर खुद को बचा रहा था।
घटना के वक्त रामकृष्ण चूंकि भूपेंद्र के पास ही बैठा था, इसलिए उसने बचने के लिए गेट से सटी बिल्डिंग के अंदर भागना उचित समझा। भूपेंद्र बराबर में ही एक दुकान के कोने में छिप गया। हमलावरों ने भागते समय पीछे से रामकृष्ण को ही भूपेंद्र समझते हुए उस पर कई फायर झोंके। तकरीबन दो मिनट के इस घटनाक्रम के बाद हमलावर लोगों को हथियार दिखाकर उन्हें लहराते हुए बाइकों से ही नुमाइश मैदान की ओर भाग गए। यह देख हर कोई सन्न रह गया। यह पूरी घटना सामने एक स्कूल के गेट पर लगे कैमरे में कैद हो गई है। सभी नौजवान हमलावर उसमें कैद हैं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज बतौर साक्ष्य जुटा लिए हैं।
दस हजार तो बहाना, क्षेत्र में प्रभाव है जमाना
पुलिस जांच में सामने आया है कि पेशे से हॉस्पिटल संचालक भूपेंद्र की हत्या को आए देवेंद्र टेड़ा का कभी उसके साथ ही खानापीना था। दोनों एक ही गांव के हैं और दोनों पर अपराध दर्ज हैं। भूपेंद्र पर बिजली विभाग के एक जेई को बंधक बनाकर पीटने व आराध्या हास्पिटल में सिपाही के परिवार पर हमला करने का आरोप है। थाने से गुंडा एक्ट की फाइल भी एडीएम सिटी के यहां लंबित है। देवेंद्र टेड़ा धनीपुर मंडी के सामने 2017 में कैश वैन लूट व सिक्योरिटी गार्ड की हत्या में जेल जा चुका है। ताजा विवाद बेशक 10 हजार रुपये का बताया जा रहा है। मगर, इससे ज्यादा दोनों में क्षेत्र में प्रभाव जमाने को लेकर खुन्नस है। गांव में दोनों अपना दबदबा बनाते हैं। भूपेंद्र को राजनीतिक संरक्षण भी मिला हुआ है। शनिवार की घटना में पिछले तीन दिन से चल रहे विवाद के क्रम में शुक्रवार रात एटा चुंगी पर भूपेंद्र व उसके भतीजे को घेर लिया था। वहां से भूपेंद्र व उसका भतीजा जैसे-तैसे बचकर आए। इसे लेकर भूपेंद्र ने देवेंद्र को सबक सिखाने की धमकी भी दी। उससे पहले देवेंद्र ने दाव चल दिया।
बेकसूर मारा गया रामकृष्ण, पांच बच्चे अनाथ हुए
दो पक्षों की रंजिश में बेकसूर रामकृष्ण मारा गया। वह मूल रूप से हरदुआगंज के इमलानी गांव का था। 15 साल पहले अपने परिवार सहित कुंवर नगर कालोनी में आकर बस गया। उसकी पत्नी की दो साल पहले एक अग्निकांड में जान चली गई थी। अब पांच बच्चों के सर से पिता का भी साया उठ गया। रामकृष्ण के पांच बच्चों में दो बड़ी बेटियों रेनू और मोनू की शादी हो चुकी है। बेटा टिंकू, शिवम, गुलशन पढ़ाई करते हैं। पत्नी मिथलेश की 11 अक्तूबर 2018 को घर में खाना बनाते समय हुए अग्निकांड में झुलसने पर दिल्ली में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी। घटना की सूचना पर रामकृष्ण के बच्चे व परिवार मेडिकल कालेज पहुंचे। वहां कोहराम मच गया।
आरटीओ में धमक रखता है भूपेंद्र
पुलिस जांच में साफ हुआ है कि भूपेंद्र का मूल काम आरटीओ से संबंधित कार्य कराने का है। आरटीओ से सटी चंद्रपाल सिंह की बिल्डिंग में उसने एक दुकान किराए पर ले रखी है। यहीं से वह काम को आपरेट करता है। रामकृष्ण बस ऑपरेटन होने के साथ इसी पेशे में था। उसकी भी इसी बिल्डिंग में एक दुकान है। भूपेंद्र को अधिकारियों की शह मिलती है। इसके चलते कार्यालय के बाबू भी उसके इशारे पर चलते हैं।
किसकी शह पर चल रहा ‘मिनी आरटीओ’
अलीगढ़। आरटीओ के बाहर चलने वाले ‘मिनी आरटीओ’ में होने वाली खुली लूट को लोग तमाशे की तरह देखते रहते हैं। शनिवार को रामकृष्ण और भूपेंद्र को जिस स्थान पर गोली मारी गई। उसे ‘मिनी आरटीओ’ के तौर पर जाना जाता है। इस ‘मिनी आरटीओ’ की बिल्डिंग चंद्रपाल सिंह के नाम पर है। इसमें 12 दुकान हैं। इन सभी दुकानों में जनसेवा केंद्र खुले हैं। जनसेवा केंद्र की आड़ में यहां से वाहन संबंधित सभी काम होते हैं। बीती 23 जुलाई को ‘मिनी आरटीओ’ में संचालित साइबर कैफों से फर्जी दस्तावेजों बनाने के रैकेट की अमर उजाला में खबर छापने के बाद जवां पुलिस ने यहां से फर्जी आरसी बनाने वाले दबोचे थे। उन्होंने 300 करीब चोरी की गाड़ियों की फर्जी आरसी बनाकर बेचना स्वीकारा था।
आरटीओ ने पुलिस को किया था आगाह, पर नहीं हटे दलाल
आरटीओ गेट से लेकर अंदर तक दलालों का राज चलता है। आए दिन विवाद होते हैं। 25 जुलाई 2019 को एसीएम द्वितीय रंजीत सिंह ने 27 दलाल पकड़े गए थे। आरटीओ ने उनके खिलाफ बन्नादेवी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मगर यह जेल से छूटकर फिर सक्रिय हो गए। मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरटीओ प्रशासन केडी सिंह ने पिछले दिनों आईजी व एसएसपी की पत्र लिखा था। इसे लेकर आए दिन होने वाली अराजकता का जिक्र करते हुए किसी भी घटना का अंदेशा जाहिर किया था। मगर कार्रवाई नहीं हुई।