एक पखवाड़े पहले थाना बन्नादेवी क्षेत्र से पकड़ा गया लखनऊ निवासी फर्जी डीआईजी कोरोना संक्रमित था। जेल जाने के बाद पिछले दिनों जब उसकी रिपोर्ट आई तो पुलिस स्टाफ में हड़कंप मच गया। उसके संपर्क में आए स्टाफ सहित 100 से ज्यादा कर्मचारियों की सैंपलिंग कराई गई तो थाने के दो दरोगा और दो सिपाही भी संक्रमित निकले। हालांकि, संक्रमितों को आइसोलेट कर दिया गया है। मगर, अभी तक पुलिस स्टाफ में भय का माहौल है।
आठ जुलाई को थाना बन्नादेवी क्षेत्र स्थित एक होटल में लखनऊ निवासी पिता-पुत्र पकड़े गये थे। आरोपी पिता अपने पुत्र को डीआईजी बताकर होटल संचालकों पर रौब गांठ रहा था। शक होने पर जब पुलिस को खबर दी गई तो हकीकत पता चली कि वे फर्जी हैं। आरोपी पिता का लखनऊ में घर है और उसने नेम प्लेट पर आईएएस लिखा रखा है, जबकि हकीकत में वह कुछ नहीं है। जेल भेजे जाने से पहले दोनों पिता पुत्र का कोरोना परीक्षण कराया गया।
एक सप्ताह पहले रिपोर्ट आई तो डीआईजी बताया जा रहा बेटा कोरोना संक्रमित निकला। इससे हड़कंप मच गया। दोनों को हिरासत में लेने से लेकर जेल भेजे जाने तक शामिल रहे स्टाफ सहित करीब 100 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की सैंपलिंग कराई गई। सीओ द्वितीय पंकज श्रीवास्तव ने स्वीकार किया कि फर्जी आईपीएस को पकड़ने में शामिल रहे थाना बन्नादेवी के दो दारोगा व दो कांस्टेबिलों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। कुछ की रिपोर्ट आनी बाकी है। चारों संक्रमितों को आइसोलेट कर दिया गया है।