पार्टी में भी गुटबाजी से बढ़ी मुश्किलें
भाजपा के महानगर और जिला संगठन के बीच लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी भी इस घटना के बाद जाहिर होने लगी है। जिला टीम से जुड़े एक नेता का यहां तक कहना है कि अब तक महानगर के किसी भी बड़े नेता ने खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी है। उनके पास पार्टी ने पूरे जिला की जिम्मेदारी दी है। कुछ नेता लखनऊ और दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व से करीबी बनाकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगे हैं।
सब चाहते हैं, हमारे साथ रहें युवा
कुछ नेताओं का यहां तक कहना है कि हर नेता अपने समर्थक युवा नेता के साथ खड़ा नजर आता है। सराय हकीम की घटना में अबतक विवाद न सुलझाने में आ रही परेशानी का कारण भी यही है। भाजपा, भाजयुमो, एबीवीपी, विहिप और बजरंग दल सहित कई संगठनों से जुड़े अधिकांश युवा एक से अधिक संगठनों के कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं, जिससे सभी संगठनों को उनकी सक्रियता का लाभ मिलता है। फायरिंग में शामिल कई आरोपी भी इन्हीं में शामिल हैं।