अलीगढ़ में सहमति नहीं होने के कारण लगभग 111 ईंट भट्ठों पर बंदी का आदेश लागू है, 80 के करीब डिफाल्टर श्रेणी में हैं। इस तरह से 191 में कामकाज पूरी तरह से बंद है, नौ जर्जर हाल हो चुके हैं।
अलीगढ़ जिले में कुल 600 ईंट भट्ठे हैं। इनमें से 400 के पास ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की (एनओसी) सहमति है, जिनमें आग धधक रही है और ईंटें पकना शुरू हो गईं हैं। सहमति नहीं होने के कारण लगभग 111 ईंट भट्ठों पर बंदी का आदेश लागू है, 80 के करीब डिफाल्टर श्रेणी में हैं। इस तरह से 191 में कामकाज पूरी तरह से बंद है, नौ जर्जर हाल हो चुके हैं।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. विश्वनाथ शर्मा ने बताया कि 191 बंद ईंट भट्ठों को चालू कराने के लिए नए नोटिफिकेशन के अनुसार पंजीकरण कराने के बाद प्रदूषण नियंत्रण की सभी शर्ताें को पूरा करना होगा। इसके बाद ही उनका संचालन हो सकेगा। इसके लिए निवेश मित्र पोर्टल पर सहमति आवेदन करना होगा। एक भट्ठे के लिए 15,000 रुपये सालाना की फीस जमा करनी होगी। इसमें 7500 रुपये वायु प्रदूषण और 7500 जल प्रदूषण नियंत्रण की फीस है। इसके साथ ही पुराने फीस स्लैब के अनुसार तीन गुनी पेनाल्टी भी देनी होगी।
उन्होंने बताया कि भट्ठे की चिमनी जिगजैग तकनीकी में परिवर्तित होनी चाहिए। मिट्टी खनन का प्रमाण पत्र होना चाहिए। इसके बाद स्थलीय जांच की जाएगी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सहमति जारी की जाएगी। इतना होने के बाद ही इनका संचालन किया जा सकता है, अन्यथा नहीं। गौर हो कि जून 2012 से पहले स्थापित ईंट भट्ठों के संचालन में जिला पंचायत के नियम लागू होते थे। इन भट्ठों को भी नए नियमों के अनुसार ही प्रदूषण नियंत्रण की शर्ताें को पूरा करना होगा।