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अलीगढ़ : रहें सतर्क, मिलावटी दूध खराब कर रहा सेहत

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रिंकू शर्मा
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अलीगढ़। सावधान! बाजार में बिकने वाला दूध आपकी सेहत खराब कर सकता है। केमिकल, यूरिया व घातक रसायन से बनने वाला सिंथेटिक/मिलावटी दूध लीवर व किडनी खराब करने के साथ ही कैंसर जैसी बीमारी दे सकता है।
एक अप्रैल 2022 से 31 जुलाई तक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा लिए गए दूध के 332 नमूनों की जांच में 133 फेल, 34 असुरक्षित एवं 20 नियमों के विपरीत पाए गए हैं। इस पर एडीएम कोर्ट ने 133 मुकदमों में 43.80 लाख रुपये एवं दीवानी कोर्ट ने 28 मुकदमों में 1.83 लाख का जुर्माना लगाया है।
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ये मिलावट का खेल शहर से लेकर देहात क्षेत्र में चल रहा है। एडीए लगातार छापे मारकर कार्रवाई कर रहा है। मिलावट खोरों पर जुर्माना भी लगाया जा रहा है। इसके बावजूद वह सुधर नहीं रहे हैं। वर्ष 2021 में एफडीए ने खाद्य पदार्थों के 346 नमूने भरे थे। इनमें 180 फेल पाए गए। 69 मामलों में 40 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया है। संवाद
मिलावटी दूध से हो सकता है कैंसर
मिलावटी दूध से फूड प्वाइजनिंग, उल्टी-दस्त की शिकायत हो सकती है। किडनी, लिवर पर बुरा असर पड़ता है। त्वचा से जुड़ी बीमारी हो सकती है। अधिक मात्रा में मिलावटी मावे से बनी मिठाई खाने से लीवर को नुकसान पहुंच सकता है। कैंसर तक हो सकता है।
ऐसे कर सकते हैं दूध की जांच
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, सिंथेटिक दूध में साबुन जैसी गंध आती है, जबकि असली दूध में कुछ खास गंध नहीं आती है। असली दूध का स्वाद हल्का मीठा होता है। मिलावटी/सिंथेटिक दूध का स्वाद डिटर्जेंट व सोडा मिला होने से कड़वा हो जाता है। असली दूध अपना रंग नहीं बदलता है, जबकि मिलावटी दूध कुछ समय बाद पीला पड़ने लगता है। असली दूध में यूरिया भी हो तो ये हल्के पीले रंग का ही होता है, सिंथेटिक दूध में यूरिया मिलाने पर गाढ़े पीले रंग का दिखने लगता है। असली दूध को उबालने पर रंग नहीं बदलता। सिंथेटिक दूध उबालने पर पीले रंग का हो जाता है। असली दूध हथेलियों पर रगड़ने पर चिकनाहट महसूस नहीं होती। मिलावटी दूध को रगड़ने पर डिटर्जेंट जैसी चिकनाहट महसूस होगी। दूध में डिटर्जेंट मिला होने पर थोड़ी सी हल्दी डाल दें तो वह लाल रंग का हो जाता है।
ऐसे होती है कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा खानपान के सामानों के नमूने लिए जाते हैं। इसके बाद इनकी प्रयोगशाला में जांच होती है। खाद्य पदार्थों में मिलावट पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 की धारा-51 में पांच लाख तक के अर्थदंड का प्रावधान है। इसके अलावा मिलावट के दौरान ऐसे हानिकारक पदार्थ, जिसके सेवन से मृत्यु हो सकती है। उसके पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 की धारा-59 के तहत कम से कम सात साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान है। दस लाख तक जुर्माना भी इसी में शामिल है।
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मिलावटखोरी की रोकथाम के लिए छापा मारकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। नमूनों की प्रयोगशाला जांच में गड़बड़ी मिलने पर मुकदमा दर्ज कर जुर्माना व सजा देने का प्रावधान है। लोगों को जागरूक करने का भी अभियान चलाया जा रहा है। सचल टीम नमूने लेकर जांच कर रही है। अलीगढ़ में प्रयोगशाला का निर्माण जारी है।
- सर्वेश मिश्रा, सहायक आयुक्त ग्रेड - 2
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