बनियापाड़ा में गोविंद जी, लक्ष्मणजी, बांकेबिहारी, सत्यनारायणजी, पथवारी माता, शनिदेव, तीन देवी मंदिर समेत 12 मंदिर हैं। पांच प्राचीन कुएं हैं, जिनमें अब पानी नहीं है, लेकिन विवाह आदि कार्यों में यहां पूजा होती है। बांके बिहारी मंदिर का इतिहास वृंदावन के मंदिर से जोड़कर बताया जाता है, इसके पीछे तर्क है कि संत हरिदास का जन्म अलीगढ़ में हुआ था, जिनके नाम पर यहां हरिदास नगर बसा है। उनके द्वारा स्थापित विग्रह बनियापाड़ा में है।
टनटनपाड़ा में वीरान पड़ा है प्राचीन शिव मंदिर
बनियापाड़ा के निकट मोहल्ला टनटनपाड़ा है, जहां प्राचीन शिव मंदिर हैं। पहले यहां वैश्य समाज की घनी आबादी थी, लेकिन अब एक भी हिंदू परिवार नहीं है। इसके चलते मंदिर की देखरेख करने वाला कोई नहीं है। मंदिर में पुजारी भी नहीं है। मंदिर को अति सुंदर बनाया गया है। मंदिर का भवन शीशों के चित्रों से सजाया गया है। इस मंदिर की चाबी एक हिंदू परिवार के पास रहती है, जब भी कोई पूजा करना चाहता है तो वह चाबी लेकर पूजा करने चला जाता है।