मार्च महीने के 28 दिन में एक्टिव क्वारंटीन में डॉक्टर 50 लाख का खाना खा गए। अब इस भारीभरकम भुगतान करने से पहले योगी सरकार ने हाथ खड़े कर दिए हैं। यह मामला मंगलवार को कमिश्ररी में हुई कोरोना मामलों की मंडलीय समीक्षा बैठक मेें उठा। इस पर अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा डा. रजनीश दुबे भी हैरान रह गये। उन्होंने शासनादेश का हवाला देते हुए बिल का भुगतान करने से इनकार कर दिया। कहा कि भविष्य में वह 50 रुपये डायट के हिसाब से भुगतान कर सकते हैं।
कोरोना का प्रकोप शुरू होने पर जेएनएमसी में लखनऊ एवं अन्य स्थानों से डाक्टरों की टीम बुलाई गई थी। डाक्टरों को महानगर के होटलों में क्वारंटीन किया गया था। पहले बैच के 42 डाक्टरों को 20 मार्च को होटल पाम ट्री एवं विकास होटल में 14 दिन के लिये क्वारंटीन किया गया था। इसके बाद अगले बैच के 42 डाक्टरों को होटल गैलेक्सी एवं होटल अली इन में ठहराया गया।
28 दिन की अवधि में डाक्टरों के खानपान से लेकर ठहरने तक का बिल 50 लाख बैठा है। यानी हर डाक्टर ने प्रतिदिन करीब 2126 रुपये का खर्चा किया। इस बिल के भुगतान को लेकर जेएनएमसी, स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन में ठनी हुई है।
यह मुद्दा मंगलवार को कोरोना मामलों की समीक्षा के लिए आये अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा डा.रजनीश दुबे एवं अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास एवं पंचायती राज मनोज सिंह के समक्ष उठा। उन्होंने शासनादेश का जिक्र करते हुए कहा कि शासनादेश में इस तरह के खर्च के लिये बजट का कोई प्रावधान नहीं है। इस वजह से इस बिल का भुगतान नहीं किया जा सकता है। जेएनएमसी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के अधीन है। यह भी भुगतान न करने का बड़ा कारण है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में अवश्य इस तरह के खर्च के एवज में 50 रुपये प्रति डाक्टर के हिसाब से भुगतान की व्यवस्था की जा सकती है। कमिश्नरी सभागार में डेढ़ घंटे तक चल समीक्षा बैठक में इस फैसले से अब एएमयू प्रशासन का सकते में आना लाजिमी हैं। इनमें से कई डाक्टर एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज और कुछ स्वास्थ्य विभाग के हैं।