अभिषेक तायल, अलीगढ़।
बदलती जीवनशैली और अनियमित खानपान के कारण महिलाएं व किशोरियां एनीमिया (रक्ताल्पता) की शिकार हो रही हैं। वर्ष 2019-21 में हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार, जिले में 15 से 49 साल तक की 56.5 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी की समस्या से जूझ रही हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, ओपीडी में आने वाली महिला मरीजों में से 70 प्रतिशत एनीमिया पीड़ित होती हैं।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार, 15 से 19 साल की 52.5 प्रतिशत महिलाओं में एनीमिया की समस्या है। बच्चों की बात करें छह माह से लेकर पांच साल तक के 62.6 प्रतिशत बच्चे खून की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं, 15 वर्ष से 49 वर्ष की 56.4 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में भी इसकी शिकायत है। गर्भावस्था के दौरान इन्हें सबसे ज्यादा खतरा होता है, जिससे जच्चा-बच्चा दोनों की जान खतरे में पड़ सकती है। संवाद
खानपान में करें बदलाव
एनीमिया के बचने के लिए महिलाओं को अपने खानपान में बदलाव की जरूरत है। वह चुकंदर, आंवला, अनार, कीवी, सेब, जामुन, गुड़, मूंगफली, तिल, अंकुरित आहार का सेवन अधिक करें। हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं। विटामिन डी व फॉलिक एसिड युक्त चीजों को अपने भोजन में शामिल करें। रोजाना योग या व्यायाम करने का नियम बनाएं। समस्या बढ़ने पर महिला रोग विशेषज्ञ के संपर्क में रहें।
ये हैं लक्षण
- जीभ, आंखों के अंदर सफेदी आना।
- आंखों का पीला पड़ना।
- कमजोरी महसूस होना।
- सांस फूलने के साथ ही चक्कर आना।
- सिर और सीने में दर्द महसूस होना।
- दिल की धड़कन का तेज होना।
- हाथ व पैरों का ठंडा पड़ना।
ये हैं आंकड़े
छह से पांच साल तक के बच्चे 62.6 प्रतिशत
15 से 49 वर्ष की गर्भवती महिलाएं 59 प्रतिशत
15 से 49 वर्ष की सभी महिलाएं 56.5 प्रतिशत
15 से 19 वर्ष की सभी महिलाएं 52.5 प्रतिशत
क्या बोले डॉक्टर
नियमित दिनचर्या नौकरी व परिवार के साथ अपने आहार और पर्याप्त आराम का ध्यान देना जरूरी होता है। सुबह व शाम योग व व्यायाम करने का एक नियमित समय बनाएं। तभी इस बीमारी से दूर रह पाएंगी।
डॉ. फरहत जमाल, प्रभारी, यूपीएचसी रघुवीरपुरी।
ओपीडी में करीब 70 प्रतिशत महिलाएं इस बीमारी से ग्रस्त आती हैं। गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा होता है। बचाव के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव करने की जरूरत है। जंक फूड की जगह हरी सब्जियों का प्रयोग करें।
- डॉ. अल्पना बंसल, स्त्री रोग विशेषज्ञ।