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Cockroach: 10 करोड़ का बाजार टिका कॉकरोच पर, सिर कटने पर जो रहता हफ्तेभर जिंदा, परमाणु हमले का नहीं होता असर

Sat, 23 May 2026 10:30 AM IST
Chaman Kumar Sharma दीपक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

घर से गोदाम तक धाक जमाने वाले ढीठ कॉकरोच को मारने के लिए अलीगढ़ जिले में हर साल 10 करोड़ रुपये के स्प्रे और कीटनाशक स्वाहा हो रहे हैं। प्रोविजन स्टोर से लेकर कीटनाशक विक्रेताओं की दुकानों तक ये बाजार फल-फूल रहा है।
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कॉकरोच - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर राजनीति के गलियारों में कॉकरोच का जिक्र बहुत हो रहा है। कॉकरोच के बहाने कोई व्यवस्था पर व्यंग्य कर रहा है तो कोई इसको लेकर अपने विचारों को ही अभिव्यक्त कर रहा है। ऐसे में यह जानना भी दिलचस्प है कि अलीगढ़ के बाजार में एक सेक्टर ऐसा भी है जो कॉकरोच पर टिका है। 

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घर से गोदाम तक धाक जमाने वाले ढीठ कॉकरोच को मारने के लिए अलीगढ़ जिले में हर साल 10 करोड़ रुपये के स्प्रे और कीटनाशक स्वाहा हो रहे हैं। प्रोविजन स्टोर से लेकर कीटनाशक विक्रेताओं की दुकानों तक ये बाजार फल-फूल रहा है। बाजार में इसके लिए घरों में प्रयोग किए जाने वाले स्प्रे, चॉक, खेत खलिहानों के लिए घातक केमिकल आदि मौजूद हैं। पर मजाल है कि परमाणु हमले को भी झेलने वाला ये जीव हार मान जाए। इस तरह बाजार गरम है, और कॉकरोच बेअसर।

शहर के नाले और नालियों में समय-समय पर एंटी लार्वा दवाओं का छिड़काव किया जाता है। इसके साथ ही बड़े नालों की बरसात से पहले सफाई भी कराई जाती है।- डॉ. रामानंद त्यागी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम


क्या कहते हैं लोग

  • रघुवीरपुरी की रहने वालीं बेबी सिंह कहती हैं कि मैं किचन की सफाई को लेकर बहुत पक्की हूं, लेकिन ये कॉकरोच जाने का नाम ही नहीं लेते। रात को जैसे ही रसोई की लाइट जलाओ, दर्जनों कॉकरोच स्लैब और बर्तनों पर रेंगते हुए दिखते हैं। उन्हें देखकर ही घृणा होने लगती है। अनूपशहर रोड की रहने वालीं नीलम शर्मा कहती हैं कि रात को बाथरूम जाने में भी डर लगता है। कमोड के पास, सिंक के नीचे, हर जगह ये छोटे-छोटे कॉकरोच छिपे रहते हैं। मैंने कई स्प्रे आजमाए, पर दो दिन बाद ये फिर वापस आ जाते हैं। आसानी से मरते नहीं हैं।
  • मेलरोज बाईपास की क्षमा कहती हैं कि इन कॉकरोच ने हमारे स्टोर रूम के डिब्बों, यहां तक कि फ्रिज के पीछे के मोटर वाले हिस्से में भी अपना घर बना लिया है। कपड़ों की अलमारी खोलो तो वहां भी ये मरे हुए मिलते हैं। इनकी वजह से पूरे घर में एक अजीब सी बदबू आने लगी है।
  • नगला मल्लाह के इमरान कहते हैं कि ड्रेनेज पाइप के रास्ते रोज नए कॉकरोच आ जाते हैं। डर लगा रहता है कि कहीं कोई कॉकरोच बच्चों को नुकसान न पहुंचा दे या उसके खिलौनों को दूषित न कर दे। इसीलिए कीटनाशकों का स्प्रे ही करवाना पड़ेगा।
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कॉकरोच के बारे में 5 बेहद हैरान करने वाले तथ्य 
  1. सिर कटने के बाद भी एक हफ्ते तक जिंदा रहता है।
  2. डायनासोर से भी पहले 30 से 32 करोड़ साल पुराने हैं।
  3. परमाणु हमले का भी असर नहीं, रेडिएशन को बेहतर तरीके से झेल सकते हैं।
  4.  पानी के अंदर 40 मिनट तक सांस रोक सकते हैं।
  5. बेहद तेज 5 किमी प्रति घंटा रफ्तार, इंसान के अनुपात में देखें तो 300 किलोमीटर प्रति घंटा

स्वच्छता ही सबसे बड़ा हथियार
कॉकरोच पृथ्वी के सबसे मजबूत और सहनशील जीवों में से हैं, जो किसी भी विपरीत परिस्थिति में जीवित रह सकते हैं। ये मुख्य रूप से सार्वजनिक ड्रेनेज सिस्टम, गंदगी से अटी नालियों, सीलन वाली जगहों, किसानों के खलिहानों और घरों की रसोई में तेजी से पनपते हैं। ये ऐसी संकरी जगहों पर छिपते हैं जहां कीटनाशक स्प्रे पहुंचाना बेहद मुश्किल होता है। इन्हें खत्म करने के लिए अत्यधिक खतरनाक और स्ट्रॉन्ग रसायनों की आवश्यकता होती है, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए चिंता का विषय है। इनकी अनियंत्रित आबादी को रोकने के लिए स्वच्छता ही सबसे बड़ा हथियार है।- सुबोध नंदन शर्मा, पर्यावरणविद्

जिले में 700 बीज और कीटनाशक विक्रेता
अलीगढ़ की पांच तहसील कोल, गभाना, इगलास, अतरौली और खैर सहित 12 ब्लाकों में करीब 700 बीज और कीटनाशक विक्रेता हैं। शहर में गांधी पार्क, पत्थर बाजार, बारहद्वारी, क्षेत्र में पंजीकृत कीटनाशक की दुकानें हैं। कॉकरोच को मारने के लिए कई-कई बार स्प्रे किया जाता है। इसे मारने के लिए कीटनाशक दवाओं में किफरोनिल एफसी और क्लोरोसाइफर जैसी दवाएं मौजूद हैं।- मो. नौशाद, मंत्री, अलीगढ़ बीज विक्रेता एसोसिएशन
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काटता नहीं, लेकिन भारी नुकसान पहुंचाता है
कॉकरोच काटता नहीं, लेकिन सीवर और गंदगी में रहने के कारण भारी नुकसान पहुंचाता है। जब यह रात में सक्रिय होकर हमारे किचन, बर्तनों और भोजन पर रेंगता है, तो अपने साथ लाए बैक्टीरिया वहां ट्रांसफर कर देता है। इससे डायरिया, कॉलरा, टाइफाइड और फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा, कॉकरोच की लार (सलाइवा) से एलर्जिन निकलते हैं, और शरीर पर इसके रेंगने से स्क्रैच या इन्फेक्शन हो सकता है। यदि समय रहते कॉकरोच की रोकथाम कर ली जाए, तो हम खुद को और अपने परिवार को कई खतरनाक संक्रमणों से सुरक्षित रख सकते हैं।- डॉ. संजय सिंघल, वरिष्ठ फिजीशियन

गर्मी और मानसून के मौसम में ज्यादा दिखाई देते हैं
कॉकरोच सबसे अधिक गर्मी और मानसून के मौसम में दिखाई देते हैं, यानी मार्च से लेकर सितंबर-अक्तूबर के महीनों में। कॉकरोच ठंडे खून वाले जीव हैं, इसलिए इन्हें पनपने के लिए गर्म और अत्यधिक नमी वाला वातावरण सबसे अनुकूल लगता है। किसान सेवा केंद्र के शहनवाज कहते हैं कि बरसात के दिनों में जब सीवर और नालियां पानी से भर जाती हैं, तो ये बाहर निकलकर घरों और किचन का रुख करते हैं। इसके विपरीत, सर्दियों में तापमान कम होने के कारण इनकी प्रजनन क्षमता धीमी हो जाती है और ये खुद को बचाने के लिए छिप जाते हैं या सुप्त अवस्था में चले जाते हैं।

यहां है ज्यादा समस्या
शहर की घनी आबादी वाले इलाके, जयगंज, भुजपुरा, नगला आशिक अली, सराय मियां, जंगलगढ़ी, खटीकान, घास की मंडी, हलवाई खाना, मदार गेट, मानिक चौक आदि पुरानी आबादी वाले, नगला मसानी, खैर रोड इलाके।
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