कॉकरोच के बारे में 5 बेहद हैरान करने वाले तथ्य
- सिर कटने के बाद भी एक हफ्ते तक जिंदा रहता है।
- डायनासोर से भी पहले 30 से 32 करोड़ साल पुराने हैं।
- परमाणु हमले का भी असर नहीं, रेडिएशन को बेहतर तरीके से झेल सकते हैं।
- पानी के अंदर 40 मिनट तक सांस रोक सकते हैं।
- बेहद तेज 5 किमी प्रति घंटा रफ्तार, इंसान के अनुपात में देखें तो 300 किलोमीटर प्रति घंटा
स्वच्छता ही सबसे बड़ा हथियार
कॉकरोच पृथ्वी के सबसे मजबूत और सहनशील जीवों में से हैं, जो किसी भी विपरीत परिस्थिति में जीवित रह सकते हैं। ये मुख्य रूप से सार्वजनिक ड्रेनेज सिस्टम, गंदगी से अटी नालियों, सीलन वाली जगहों, किसानों के खलिहानों और घरों की रसोई में तेजी से पनपते हैं। ये ऐसी संकरी जगहों पर छिपते हैं जहां कीटनाशक स्प्रे पहुंचाना बेहद मुश्किल होता है। इन्हें खत्म करने के लिए अत्यधिक खतरनाक और स्ट्रॉन्ग रसायनों की आवश्यकता होती है, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए चिंता का विषय है। इनकी अनियंत्रित आबादी को रोकने के लिए स्वच्छता ही सबसे बड़ा हथियार है।- सुबोध नंदन शर्मा, पर्यावरणविद्
जिले में 700 बीज और कीटनाशक विक्रेता
अलीगढ़ की पांच तहसील कोल, गभाना, इगलास, अतरौली और खैर सहित 12 ब्लाकों में करीब 700 बीज और कीटनाशक विक्रेता हैं। शहर में गांधी पार्क, पत्थर बाजार, बारहद्वारी, क्षेत्र में पंजीकृत कीटनाशक की दुकानें हैं। कॉकरोच को मारने के लिए कई-कई बार स्प्रे किया जाता है। इसे मारने के लिए कीटनाशक दवाओं में किफरोनिल एफसी और क्लोरोसाइफर जैसी दवाएं मौजूद हैं।- मो. नौशाद, मंत्री, अलीगढ़ बीज विक्रेता एसोसिएशन
काटता नहीं, लेकिन भारी नुकसान पहुंचाता है
कॉकरोच काटता नहीं, लेकिन सीवर और गंदगी में रहने के कारण भारी नुकसान पहुंचाता है। जब यह रात में सक्रिय होकर हमारे किचन, बर्तनों और भोजन पर रेंगता है, तो अपने साथ लाए बैक्टीरिया वहां ट्रांसफर कर देता है। इससे डायरिया, कॉलरा, टाइफाइड और फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा, कॉकरोच की लार (सलाइवा) से एलर्जिन निकलते हैं, और शरीर पर इसके रेंगने से स्क्रैच या इन्फेक्शन हो सकता है। यदि समय रहते कॉकरोच की रोकथाम कर ली जाए, तो हम खुद को और अपने परिवार को कई खतरनाक संक्रमणों से सुरक्षित रख सकते हैं।- डॉ. संजय सिंघल, वरिष्ठ फिजीशियन
गर्मी और मानसून के मौसम में ज्यादा दिखाई देते हैं
कॉकरोच सबसे अधिक गर्मी और मानसून के मौसम में दिखाई देते हैं, यानी मार्च से लेकर सितंबर-अक्तूबर के महीनों में। कॉकरोच ठंडे खून वाले जीव हैं, इसलिए इन्हें पनपने के लिए गर्म और अत्यधिक नमी वाला वातावरण सबसे अनुकूल लगता है। किसान सेवा केंद्र के शहनवाज कहते हैं कि बरसात के दिनों में जब सीवर और नालियां पानी से भर जाती हैं, तो ये बाहर निकलकर घरों और किचन का रुख करते हैं। इसके विपरीत, सर्दियों में तापमान कम होने के कारण इनकी प्रजनन क्षमता धीमी हो जाती है और ये खुद को बचाने के लिए छिप जाते हैं या सुप्त अवस्था में चले जाते हैं।
यहां है ज्यादा समस्या
शहर की घनी आबादी वाले इलाके, जयगंज, भुजपुरा, नगला आशिक अली, सराय मियां, जंगलगढ़ी, खटीकान, घास की मंडी, हलवाई खाना, मदार गेट, मानिक चौक आदि पुरानी आबादी वाले, नगला मसानी, खैर रोड इलाके।