मुहर्रम की आठवीं तारीख को बुधवार की रात को नजफ हैदर के इमामबाड़ा और बाबरी मंडी से अलम का जुलूस निकला। यह परंपरागत मार्गों से गुजरते हुए देर रात लगभग एक बजे पुनः इमामबाड़ा पहुंचकर संपन्न हुआ।
इससे पूर्व इमामबाड़ा में मौलाना अहसन अब्बास ने कर्बला के शहीदों के त्याग, बलिदान और इंसानियत के लिए दी गई कुर्बानी के बारे में बताया। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन के संदेश को अपनाने का आह्वान किया। जुलूस के दौरान अंजुमन यादगारे हुसैनी, अंजुमन सोगवारे सकीना के सदस्यों ने नौहाख्वानी और मातम कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
नौहाख्वानी करने वालों में अथर अब्बास, यावर अब्बास, ताहिर, बुंदन, आसिफ, शाकिर आदि शामिल रहे। जुलूस में या हुसैन की सदाएं गूंजीं। इस अवसर पर कर्बला के मुतवल्ली मुख्तार जैदी, राजू बुंदन, तकी हैदर, शमीम अख्तर बाॅबी आदि मौजूद रहे।