इकराम वारिस, अलीगढ़।
राजनीति के फलक पर तारे की मानिंद चमकने वाले अजित सिंह ने राजनीति में आने से इनकार कर दिया था, क्योंकि वह अमेरिका में रहना चाहते थे। उनसे राजनीति में आने का अनुरोध पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के खास राजेंद्र सिंह ने किया था। बाद में मां गायत्री देवी के कहने पर वह अमेरिका से स्वदेश आ गए थे।
अजित सिंह का अलीगढ़ से भी खास रिश्ता है, क्योंकि उनकी ससुराल विष्णुपुरी में है। सिंचाई विभाग में इंजीनियर सुखवीर सिंह की बेटी से अजित सिंह का रिश्ता हो गया। उस समय चौधरी चरण सिंह उप्र के मुख्यमंत्री थे। शादी में राजेंद्र सिंह, दलवीर सिंह, योगेश शर्मा सहित राजनेता शामिल हुए।
जब चौधरी चरण सिंह बीमार हुए, तब अलीगढ़ राजनीति का बड़ा गढ़ बना, क्योंकि राजेंद्र सिंह प्रदेश अध्यक्ष व विधायक दल के नेता थे। एक खेमे के मुलायम सिंह यादव, हेमवती नंदन बहुगुणा चाहते थे कि वह चौधरी चरण सिंह के राजनीतिक वारिस हो जाएं, तो राजेंद्र सिंह वाला खेमा चाहता था कि अजित सिंह को अमेरिका से बुलाकर उन्हें ही राजनीतिक वारिस बनाया जाए। अजित सिंह की मां गायत्री देवी, राजेंद्र सिंह को अपना बड़ा बेटा मानती थीं। जब चौधरी चरण सिंह कोमा में चले गए तो गायत्री देवी ने कहा कि अजित सिंह को बुला लिया जाए।
राजेंद्र सिंह ने उन्हें फोन करके भारत में राजनीति करने को कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बाद में मां ने उन्हें बुलाया। अजित भारत आ गए और राजनीतिक विरासत संभाल ली। इसी बीच मुलायम सिंह यादव का खेमा एक तरफ हो गया और दूसरा खेमा राजेंद्र सिंह व अजित सिंह का एक तरफ हो गया। चंद्रशेखर के नेतृत्व में जनता पार्टी बनी। बाद में अजित सिंह ने जनता दल नाम से नया दल बना लिया।
जब राजेंद्र सिंह इगलास विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हारे और मुलायम सिंह चुनाव जीत गए थे तब मुलायम मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। अजित सिंह भी चुनाव हार गए थे। इसी बीच राजेंद्र सिंह व अजित सिंह के परिवार के बीच दूरियां बढ़ती गईं। अजित सिंह फिर कांग्रेस में शामिल हो गए। बाद में अजित सिंह ने राष्ट्रीय लोकदल बना लिया, जबकि राजेंद्र सिंह ने चौधरी चरण सिंह द्वारा बनाए गए लोकदल को सक्रिय कर दिया।
आगे आकर मोर्चा लेने वाले थे अजित सिंह : दलवीर
बरौली के भाजपा विधायक ठा. दलवीर सिंह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह व रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ. अजित सिंह से पारिवारिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि जब वह छात्र थे, तब चौ. चरण सिंह सभा करने कंपनी बाग आए थे। उनके साथ जुड़ गया। जब राजनीति में सक्रिय हुआ, तब अजित सिंह ने पहली बार उन्हें टिकट दिया और विधायक बन गया।
भाजपा में आने से पहले उन्हें बताया, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की, बल्कि मुस्करा दिए। उनसे कहा कि रालोद व भाजपा गठबंधन करके चुनाव लड़े। इस पर चौधरी साहब ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता, क्योंकि अगर रालोद-भाजपा गठबंधन हो गया, मुस्लिम वोट बैंक रालोद से खिसक जाएगा।
दलवीर सिंह ने अजित सिंह के बारे में एक और किस्सा सुनाया। एक बार मेरठ में किसान आंदोलन हो रहा था। इसमें पुलिस लाठीचार्ज करने वाली थी। इसकी जानकारी चौधरी साहब को देते हुए कहा कि यहां आपको आगे नहीं आना चाहिए। इस पर बोले, ऐसा नहीं हो सकता। वह आगे आए। मजबूरन सभी को आगे आना पड़ा। भले ही पार्टी उन्होंने बदल ली, लेकिन चौधरी साहब से रिश्ता हमेशा बना रहा।
अजित सिंह से मिलने आए थे चंद्रशेखर : योगेश
जिले के सशक्त किसान नेता रहे राजेंद्र सिंह के राजनीतिक सलाहकार योगेश शर्मा बताते हैं कि जब अमेरिका से अजित सिंह स्वदेश आ गए, तो एक बड़े चेहरे के रूप में सबके सामने लाने के लिए राजेंद्र सिंह ने सभी तैयारियां मुकम्मल कर लीं। अजित सिंह ने दिल्ली से लेकर पूर्वांचल तक किसान पद यात्रा शुरू की, जिसकी रूप-रेखा राजेंद्र सिंह ने तैयार की थी।
इसका उद्देश्य अजित सिंह के चेहरे को चमकाना और दल को खड़ा करना था। दिल्ली से अलीगढ़ आते-आते अजित सिंह इतने मशहूर हो गए थे, उनसे जुड़ते गए। योगेश शर्मा ने कहा कि तुर्क नेता चंद्रशेखर यहां अजित सिंह से मिलने आए थे। हाथरस में सभा हुई थी। चंद्रशेखर ने उसी सभा में कहा था कि जब कोई नया दल बनेगा, तब अजित सिंह दल के कर्ता-धर्ता होंगे।