आईएमए के मीडिया प्रभारी डॉ. प्रदीप बंसल बताते हैं कि इस मौसम में निजी अस्पतालों की ओपीडी में भी सांस व अस्थमा के रोगियों की संख्या 40 फीसदी तक बढ़ गई है। बताया कि वातावरण में मौजूद सूक्ष्म कण सांस के जरिये फेफड़े में पहुंचते हैं। इससे ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी, अस्थमा के मरीजों की बीमारी बढ़ सकती है। इस वजह से अस्थमा का अटैक भी हो सकता है।
ये होती हैं बीमारियां
जुकाम, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, गले में संक्रमण, अस्थमा, फेफड़ों से संबंधित बीमारियां आदि।
ये बरतें सावधानी
घर से बाहर निकलते समय मुंह पर मास्क या रुमाल बांधे। आंखों पर चश्मा लगाएं। एक ही मास्क का कई बार उपयोग न करें, इससे संक्रमण फैलने का खतरा है। अस्थमा के मरीज बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।