अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पिछले साल दिसंबर में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में संबोधन करने आए गोरखपुर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील को सुप्रीम कोर्ट ने भी बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट से उनकी रिहाई के बाद राज्य सरकार और प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार कर दिया।
इस फैसले के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों में खुशी की लहर है। उन्होंने इसे न्याय की जीत बताया है। डॉ. कफील के स्थानीय अधिवक्ता इरफान गाजी ने बताया कि डॉ. कफील के संबंध में राज्य सरकार और प्रशासन द्वारा दायर की गई याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार करते हुए रद्द कर दिया है।
यह न्याय की जीत है। हम लगातार यह कह रहे थे कि अपने संबोधन में डॉ. कफील ने कुछ भी गलत नहीं किया है। हमने पहले भी प्रदेश के मुख्यमंत्री और अन्य पदों पर बैठे लोगों से अपील की थी कि वे डॉ. कफील का उत्पीड़न न करें। उन्हें तत्काल जेल से रिहा करें। उन पर लगाए गए आरोप वापस लें। आज सुप्रीम कोर्ट के इस कदम के बाद यह साफ हो गया है कि डॉ. कफील पूरी तरह निर्दोष हैं। पवित्र हैं।
- डॉ. हमजा मलिक, पूर्व अध्यक्ष, रेजिडेंट डॉक्टर्स एकेडमी
पिछले वर्ष नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जो आंदोलन चल रहा था, उसमें जब डॉ. कफील संबोधन करने आए थे, तब मैंने भी उनका संबोधन सुना था। उन्होंने संवैधानिक दायरे में रहते हुए अपनी बात कही थी। लेकिन प्रशासन और प्रदेश सरकार की दमनकारी नीतियों के चलते बात बढ़ गई। डॉ. कफील पर मुकदमा दर्ज करना भी असंवैधानिक था। इसके बाद जब एक मामले में डॉ. कफील को अदालत से राहत मिली तो प्रशासन और प्रदेश सरकार ने गलत भावना से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की। सरकार के यह कदम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद असंवैधानिक साबित हुए हैं।
- सैयद माजिद हुसैन जैदी, पूर्व उपाध्यक्ष, छात्रसंघ एएमयू
- कब-कब क्या-क्या हुआ
- 12 दिसंबर 2019- नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में चल रहे आंदोलन में एएमयू के बॉबे सैयद पर डॉ. कफील ने संबोधन किया। इसी बीच 15 दिसंबर की रात एएमयू में बवाल होने पर डॉ. कफील के संबोधन को आपत्तिजनक मानते हुए सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज किया गया।
- 28 दिसंबर 2019 को डॉ. कफील को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें अलीगढ़ लाकर कोर्ट में पेश किया गया। लेकिन उसी दिन मथुरा जेल में शिफ्ट कर दिया गया।
- 13 फरवरी 2020- थाना सिविल लाइन में दर्ज मुकदमे में अदालत से राहत मिलने के बाद भी मथुरा जेल में बंद डॉ. कफील की रिहाई से पहले ही उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई कर दी गई। डॉ. कफील का जेल से रिहा होने का रास्ता बंद हो गया। रासुका के आदेश में स्पष्ट उल्लेख था कि उनके बयान ने एएमयू व शहर में माहौल खराब किया।
-01 सितंबर 2020- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉ. कफील पर की गई राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की कार्रवाई को गलत ठहराया और उन्हें रिहा करने के आदेश दिए। इसके बाद डॉ. कफील को मथुरा जेल से रिहा कर दिया गया।
- 09 नवंबर 2020- हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने अपने द्वारा की गई कार्रवाई को उचित ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा। इस पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई थी।