एसटीएफ ने रोडवेज बसों का फर्जी टिकट मामला खोल दिया और शासन ने सख्ती दिखाते हुए कई अधिकारियों और कर्मियों को निलंबित कर दिया लेकिन इस माफिया का असली संरक्षणदाता कौन है..? इसका जवाब अब तक नहीं मिला है। क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर घोटाला करना तभी मुमकिन है जब किसी बड़े अधिकारी या किसी रसूखदार का वरदहस्त साथ हो। एसटीएफ की पूरी जांच और शासन की पूरी कार्रवाई में ये बात अब तक गोलमोल है।
जिस मेघ सिंह को पूरे मामले का मास्टर माइंड बताया गया वो अलीगढ़ में किस अधिकारी के साये में बढ़ रहा था..? लखनऊ में सचिवालय तक उसकी पहुंच किस अधिकारी तक थी..? इसका जवाब अब तक सामने नहीं आया है। शायद यही वजह है कि सरकारी सिस्टम में घोटाला करना बहुत आसान है बस सेटिंग ऊपर तक होनी चाहिए। अलीगढ़ में एक साल पहले रोडवेज का स्क्रैप घोटाला मौके पर ही धर्मकांटे पर पकड़ा गया लेकिन जो अधिकारी दोषी थे, उनको कुछ महीने बाद ही नई तैनाती दी गई। अब बड़ा सवाल ये है कि अगर घोटालेबाजों को इतनी आसानी से नई तैनाती मिल सकती है तो फिर घोटाले क्यों नहीं होंगेे..?
बहरहाल, रोडवेज में फ र्जी टिकट घोटाले में अधिकारियों पर गाज गिरने की खबर अलीगढ़ में जंगल में आग की तरह फैली। आगरा, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, सादाबाद और रास्ते में चल रहे ड्राइवर कंडक्टर और अधिकारियों के मोबाइल पर व्हाटस मैसेज तेजी से फैले। लखनऊ मुख्यालय के निलंबन पत्र की कॉपी मोबाइल पर तेजी से घूमी। इस सख्त कार्रवाई के बाद माफिया से दूर रहने वाले अधिकांश अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली। ये अधिकारी और कर्मी उस फर्जी टिकट माफिया गिरोह के आतंक से परेशान थे। इसमें वह लोग भी शामिल है जो अपनी ड्यूटी ईमानदारी से करना चाहते थे लेकिन माफिया बाहुबल से बसों को अपने ‘सिस्टम’ से चलाना चाहता था।
एसटीएफ ने इस मामले में करीब 50 लोगों की सूची बनाकर मुख्यालय को सौंपी थी। इनमें से अधिकतर संविदा चालक और परिचालकों पर कार्रवाई हो चुकी है जबकि संचालन कराने वाले क्षेत्रीय प्रबंधक व सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक अभी तक बचे हुए थे। गत दिनों विभागीय जांच के लिए टीम भी आई थी। ये टीम पिछले कई महीनों का ईवे बिल समेत अन्य कागजात अपने साथ जांच के लिए लखनऊ ले गई थी। माना जा रहा है कि इसी जांच एवं एसटीएफ रिपोर्ट के आधार पर शासन ने क्षेत्रीय प्रबंधक अतुल त्रिपाठी, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक बुद्ध विहार योगेंद्र प्रताप सिंह व हाथरस के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक को निलंबित कर दिया है।
नाम ना छापने की शर्त पर कई कर्मियों ने बताया कि फ र्जी टिकट माफिया का इतना खौफ था कि उन लोगों को मजबूरी में खाली गाड़ी लेकर चलना पड़ता था। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट व गालीगलौज होता था। कई बार शिकायत करने के बाद भी अधिकारी माफिया के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते थे। अलीगढ़ परिक्षेत्र से चेकिंग के लिए नियुक्त अधिकारियों की टीम माफिया की बसों को देखने के बाद मुंह फेर लेती थी। कर्मचारी यूनियनों ने भी कई बार आवाज बुलंद करनी चाही लेकिन उनको भी खामोश कर दिया गया।
फ र्जी टिकट रैकेट के कारण परिवहन निगम को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। साथ ही कर्मचारियों का शोषण भी हो रहा था। आरएम अतुल त्रिपाठी से वार्ता में संगठन ने कई इस बार इस मामले को उठाया लेकिन अधिकारियों ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई।
-हरीश बाबू उपाध्याय, महामंत्री रोडवेज इम्पलाइज यूनियन।
अब रोडवेज के लखनऊ मुख्यालय में इस माफिया के संरक्षणदाताओं पर कार्रवाई करने का लक्ष्य है। इसके लिए संघर्ष जारी रहेगा। इसमें मुख्य प्रधान प्रबंधक संचालन एचएस गावा और प्रधान प्रबंधक साद सईद शामिल हैं।
पंकज लवानिया, मुख्य शिकायतकर्ता
रोडवेज के फर्जी टिकट मामले में शासन ने जिस तरह से सख्त कार्रवाई की है। एक साल पहले हुए स्क्रैप घोटाले में भी वैसी ही कार्रवाई होनी चाहिए। इस मामले में दोषी अधिकारियों को नई तैनाती मिल जाना बताता है रोडवेज में घोटालेबाजों के कितने संरक्षणदाता है।
नितिन अरोड़ा, पूर्व पार्षद।
माफि या-अफसर गठजोड़ का अमर उजाला ने किया था खुलासा
रोडवेज में पिछले कई दशकों से चल रहे फ र्जी टिकट रैकेट का भंडाफ ोड़ होने से पहले और इसके दौरान अमर उजाला ने समय-समय पर अपनी खबरों से उन अधिकारियों की ओर इशारा किया था, जिनका संबंध माफि या से था। जिन पर बुधवार को निलंबन की कार्रवाई हुई। इसमें माफि या के सचिवालय में संबंध होने तक की खबर प्रकाशित की गई थी। इस खबर के आने के बाद माफि या और उसके चाहने वाले अधिकारियों में खलबली मच गई थी। कार्रवाई की जद में आए क्षेत्रीय प्रबंधक अतुल त्रिपाठी, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक बुद्ध विहार डिपो योगेंद्र प्रताप सिंह, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक हाथरस, यातायात निरीक्षक चक्कर सिंह व लक्ष्मण सिंह के खिलाफ कार्रवाई होने की संभावना पूर्व में जताई जा चुकी थी।
कब होगी सोनू व अशोक चौधरी की गिरफ्तारी..?
इगलास में 21 अगस्त को एसटीएफ और पुलिस ने इस रैकेट के कथित माफि या मेघ सिंह व देवेंद्र सिंह समेत 11 लोगों को मौके से गिरफ्तार किया था लेकिन इस दौरान पुलिस को गच्चा देकर भागे अशोक व सोनू का अभी तक पुलिस कोई सुराग नहीं लगा पाई है। एसटीएफ सूत्रों का कहना है कि अशोक व सोनू की गिरफ्तारी रोकने के लिए सत्ताधरी पार्टी के नेताओं का इगलास पुलिस पर भारी दबाव है। एसटीएफ सूत्रों का यह दावा एकदम सही साबित हो रहा है क्योंकि कार्रवाई के लगभग डेढ़ माह बाद भी पुलिस सोनू व अशोक चौधरी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।