कमजोर नींव पर मजबूत भवन की कल्पना नहीं कर सकते। इसी तरह सुरक्षित मातृत्व के लिए किशोरियों का स्वस्थ होना जरूरी है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नम्रता भारद्वाज कहती है कि जनपद की आबादी करीब 40 लाख है, जिसमें किशोर की आबादी करीब 19 प्रतिशत है। इस हिसाब से किशोरियों की संख्या अनुमानित तौर पर साढ़े तीन लाख है। यही किशोरियां आगे चलकर मां बनेगी। इसलिए सुरक्षित मातृत्व के लिए किशोरियों का स्वस्थ होना जरूरी है।
बालिकाओं को कई तरह की समस्याएं होती है। माहवारी संबंधी परेशानियां, कुपोषण एवं खून की कमी प्रमुख है। डॉ. नम्रता कहती है कि कम उम्र से ही हमें न सिर्फ बच्चियों कोे जागरूक करना है, लेकिन ऐसे कदम भी उठाने हैं, जो भविष्य के लिए मजबूती प्रदान कर सके। माहवारी के समय स्वच्छता का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
नैपकिन अथवा कपड़ा ही प्रयोग में लाना चाहिए। किसी भी प्रकार की अनियमितता को अनदेखा न करें। तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। इस उम्र में शरीर का विकास होता है, इसलिए सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों की आवश्यकता बढ़ जाती है। एक कमजोर बालिका, एक कमजोर युवती बाद में एक कमजोर मां बनेगी।
यानी आने वाली पीढ़ी भी कमजोर होगी। डॉ. नम्रता कहती है कि भारत सरकार द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत हर किशोरी को सप्ताह में एक बार आयरन व फौलिक एसिड की गोली खानी है। हर छह माह पर कीड़े मारने की दवा खानी है।
इस उम्र में की गई छोटी सी पहल, आगे चलकर अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। इसके साथ ही संतुलिक एवं पौष्टिक आहार का महत्व हर किशोरी एवं परिजनों को समझना होगा। इस उम्र की बच्चियों के लिए दो टीका बहुत महत्वपूर्ण है। एक रूबेला (यदि बचपन में न लगा हो) एवं दूसरा गर्भाशय कैंसर से बचाव का टीका जरूर लगवाना चाहिए।