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पूर्व विधायक संजीव राजा के खिलाफ एडीजी जोन की गवाही दर्ज

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एसीजेएम प्रथम कोर्ट में पेशी के लिए जाते पूर्व विधायक संजीव राजा। - फोटो : CITY OFFICE
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पूर्व विधायक संजीव राजा के खिलाफ दर्ज 27 साल पुराने मुकदमे में गवाही देने सोमवार को एडीजी जोन राजीव कृष्ण दीवानी पहुंचे। इस दौरान वे एमपी/एमएलए मामलों की सुनवाई वाली निचली अदालत एसीजेएम-प्रथम में पेश हुए, जहां उनकी गवाही दर्ज की गई। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने उनसे जिरह की। अब इस मामले में पांच जुलाई तारीख नियत की गई है। इस तारीख पर तीसरे गवाह के रूप में तत्कालीन एडीएम सिटी राजीव रौतेला को समन जारी किए गए हैं।
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सहायक अभियोजन अधिकारी हरिओम सिंह के अनुसार, 22 जुलाई 1995 को तत्कालीन एसओ कप्तान सिंह चौहान की ओर से धारा 147, 148, 332, 353, 427, 504 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें उस समय के भाजयुमो के वरिष्ठ नेता संजीव राजा आरोपी हैं। इस मुकदमे में एडीजी आगरा जोन राजीव कृष्ण (आईपीएस, तत्कालीन एसपी सिटी अलीगढ़) दूसरे नंबर के गवाह हैं। इस मुकदमे का ट्रायल एमपी/एमएलए मामलों की सुनवाई वाली निचली अदालत एसीजेएम प्रथम संदीप कुमार कोर्ट में चल रहा है।
एपीओ हरिओम सिंह ने बताया कि नियत तारीख पर एडीजी जोन राजीव कृष्ण गवाही देने न्यायालय में पेश हुए और उनकी गवाही दर्ज की गई। इस दौरान पूर्व विधायक संजीव राजा भी अदालत में हाजिर हुए। उनकी पत्नी मौजूदा शहर विधायक मुक्ता संजीव राजा भी दीवानी परिसर में मौजूद रहीं। यहां एडीजी जोन की गवाही पूरी होने के बाद बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रवीन कुमार वार्ष्णेय ने जिरह की और गवाह से क्रास सवाल किए। इस दौरान न्यायालय में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी व संयुक्त निदेशक अभियोजन सुशील कुमार सिंह भी मौजूद रहे।
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30 नवंबर को गवाही को आए थे राजीव कृष्ण
इस मुकदमे का ट्रायल पहले एमपी/एमएलए की अदालत एडीजे-4 में चल रहा था, जिसमें 30 नवंबर 2021 को एडीजी जोन राजीव कृष्ण गवाही के लिए पेश हुए थे, मगर उससे ठीक पहले 24 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने आदेश दिया, जिसमें कहा गया था कि मजिस्ट्रेट न्यायालय में सुनवाई योग्य मुकदमों की सुनवाई मजिस्ट्रेट न्यायालयों में किया जाना उचित है। चूंकि, यह मुकदमा मजिस्ट्रेट न्यायालय में सुनवाई योग्य है। इसलिए इसकी सुनवाई मजिस्ट्रेट न्यायालय में हो। बचाव पक्ष की इस दलील को ध्यान में रख उस समय एडीजे कोर्ट में राजीव कृष्ण बयान दर्ज नहीं किए थे। बाद में इस मुकदमे को एमपी/एमएलए मामलों की सुनवाई के लिए नियत मजिस्ट्रेट न्यायालय स्थानांतरित कर दिया। इसके बाद यहां ट्रायल शुरू हुआ है।
महंगाई विरोधी जुलूस निकालने पर हुआ था मुकदमा
पूर्व विधायक संजीव राजा के अधिवक्ता प्रवीन वार्ष्णेय ने बताया कि, मुकदमे के अनुसार भाजपा युवा मोर्चा ने 22 जुलाई 1995 को महंगाई के विरोध में जुलूस निकाला था। इसकी पुलिस प्रशासन से अनुमति थी। जुलूस का नेतृत्व वरिष्ठ भाजयुमो नेता संजीव राजा कर रहे थे। जुलूस रेलवे रोड से अब्दुल करीम चौराहे की ओर बढ़ा तो पुलिस प्रशासन ने माता वाली गली के सामने यह कहते हुए रोक लिया कि अनुमति वाले नियत मार्ग के अलावा दूसरे मार्ग पर जुलूस नहीं जाएगा। जुलूस अब्दुल करीम चौराहे की ओर ले जाने की जिद पर तत्कालीन एडीएम सिटी के निर्देश पर तत्कालीन एसपी सिटी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया। इस मामले में तत्कालीन एसओ देहली गेट कप्तान सिंह चौहान की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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