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अलीगढ़ : 10 साल पुरानी रिंग रोड पर एडीए दौड़ाएगा विकास का पहिया

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अलीगढ़ महायोजना का नक्शा। - फोटो : CITY OFFICE
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महायोजना 2031 का अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) ने प्रारूप जारी कर दिया है। जिसमें 60 किलोमीटर लंबाई में 10 साल पहले प्रस्तावित रिंग रोड की कार्ययोजना में कोई बदलाव नहीं किया है। जबकि मौके पर वर्तमान में हालात यह हैं कि बौनेर से रामघाट रोड और दिल्ली रोड पर अवैध निर्माण हो चुके हैं। रास्ता भी संकरा हैं। ऐसे में प्राधिकरण की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं कि इस रिंग रोड का निर्माण कैसे पूरा होगा। वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञों की मानना है कि रिंग रोड आबादी क्षेत्र से बाहर हरदुआगंज के आसपास गैर आबादी क्षेत्र से प्रस्तावित होना चाहिए ताकि अनावश्यक वाहन शहर में न प्रवेश कर पाएं।
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एडीए ने 2021 तक की महायोजना में भी इसी स्थान से रिंग रोड प्रस्तावित की थी। दस साल पहले अवैध निर्माण कम थे, आबादी भी नहीं थी, उन दिनों इस स्थान से रिंग रोड बनाने में एडीए सफल नहीं हो सका था। अब आसपास आबादी भी बढ़ गई है, जिसके कारण जमीन को अधिग्रहीत कर सड़क को चौड़ा करना संभव नहीं है। बेहतर होता कि प्रस्तावित रिंग रोड हरदुआगंज के गैर आबादी क्षेत्र से रामघाट रोड और उसी के बाद जवां होते हुए दिल्ली से जोड़ते।
ये आएंगी दिक्कतें
- आबादी क्षेत्र में जमीन की लागत अधिक होने के कारण अधिग्रहण आसान नहीं
- पांच किलोमीटर लंबे सिंचाई विभाग के नाले के कारण ड्रेनेज सिस्टम की समस्या
- रामघाट रोड पर चौराहा बनाया जाना संभव नहीं, क्योंकि यह कॉमर्शियल क्षेत्र है
- क्वार्सी चौराहे पर पहले से ही जाम रहता है, इसके बनने से जाम और बढ़ेगा
आबादी के बाहर रिंग रोड होगा आसान
बौनेर से हरदुआगंज के आसपास तक रिंग रोड गैर आबादी क्षेत्र में होने के कारण आसान होगा। इस क्षेत्र में किसानों की जमीन अधिग्रहीत करने में आसानी होगी। इसके बाद हरदुआगंज से जवां और अनूपशहर रोड से दिल्ली रोड पर जोड़कर बेहतर रिंग रोड बनाया जा सकता है। पनैठी से आगरा रोड होते हुए दिल्ली के लिए जीटी रोड पहले से ही फोरलेन बना हुआ है।
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विशेषज्ञ की टिप्पणी: व्यावहारिक नहीं प्रस्तावित रिंग रोड
बौनेर से क्वार्सी और उसके बाद दिल्ली रोड तक जोड़ने के लिए यह रिंग रोड व्यवहारिक नहीं है। यदि यह रोड व्यवहारिक होती तो दस साल पहले ही बन जाती। एक तो पूरे इलाके में आबादी हो गई है, दूसरे रिंग रोड के बराबर सड़क को चौड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह भी नहीं है। आसपास की जमीन कीमती होने के कारण उसे खरीदा जाना भी संभव भी नहीं है। बेहतर तो यह होगा कि इसके स्थान पर गैर आबादी क्षेत्र हरदुआगंज से होकर रिंग रोड को निकाला जाए। अरुण श्रीवास्तव, विशेषज्ञ, हाईवे
यह महायोजना 2031 का प्रस्ताव है। जिसमें लोगों से एक महीने तक आपत्तियां मांगी गईं हैं। इन आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद ही अंतिम रूप देकर शासन में अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। जो भी प्रस्ताव तार्किक होंगे और विशेषज्ञों की राय भी उनके लिए सही होगी, उसी के अनुसार प्राधिकरण
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शासन में संस्तुति करेगा। गौरांग राठी, एडीए उपाध्यक्ष

अरुण कुमार श्रीवास्तव। सड़क विशेषज्ञ- फोटो : CITY OFFICE

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