अभिनेता धर्मेंद्र और गीतकार गोपाल दास नीरज
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अभिनेता धर्मेंद्र और प्रसिद्ध गीतकार गोपाल दास नीरज का मुंबई में अच्छा साथ रहा। गोपाल दास नीरज के बेटे मिलन प्रभात गुंजन ने 1978 के आसपास दिल्ली में हुई एक पुरानी मुलाकात को याद किया। उन्होंने बताया, पापा से मिलते ही धर्मेंद्र ने उन्हें गले लगा लिया और कहा, बड़े दिन बाद मुलाकात हुई। जब नीरज ने अपने बेटे (मिलन प्रभात गुंजन) का परिचय दिया, तो धर्मेंद्र ने तुरंत पूछा, क्या यह भी फिल्मों में है। नीरज ने जवाब दिया, नहीं यह इंजीनियर है।
इस पर धर्मेंद्र ने एक भावुक बात साझा की। उन्होंने कहा कि उनके पिता भी एक अध्यापक थे और चाहते थे कि वह भी पढ़-लिखकर अध्यापक बनें। धर्मेंद्र और नीरज का संपर्क राज कपूर की ''मेरा नाम जोकर'' (1970) फिल्म के दौरान बना था, जिसमें नीरज ने एक ऐसा गीत लिखा जो आज भी लोगों की जुबान पर है।
गोपाल दास नीरज ने धर्मेंद्र के अभिनय से सजी राज कपूर की इस कालजयी फिल्म के लिए ऐ भाई जरा देख के चलो, आगे भी नहीं पीछे भी'' जैसा अमर गीत लिखा था। यह गीत राज कपूर पर फिल्माया गया था, जिसमें धर्मेंद्र भी एक रूसी कलाकार के साथ अभिनय कर रहे थे।
फूल और पत्थर के दौरान अलीगढ़ में जुनून
धर्मेंद्र की पहली बड़ी हिट फिल्म फूल और पत्थर (1966) की रिलीज के समय अलीगढ़ में अभिनेता को देखने का जबरदस्त जुनून था। फिल्म की रिलीज के समय धर्मेंद्र और फिल्म के निर्देशक ओपी रल्हन (जिन्होंने फिल्म में अभिनय भी किया था) को दिल्ली से अलीगढ़ आना था। उस समय सिनेमा के कैंटीन संचालक के मित्र रहे अनिल वर्मा कहते हैं कि अभिनेता की एक झलक पाने के लिए निशात सिनेमा के बाहर और बारहद्वारी पर हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई थी।
देर रात ओपी रल्हन अकेले एक गाड़ी से आए। उन्होंने आते ही भीड़ को बताया कि कुछ व्यवस्थाओं के चलते धर्मेंद्र नहीं आ पाए हैं, लेकिन उन्होंने अपने प्रशंसकों को प्यार और शुभकामनाएं भेजी हैं। रल्हन ने भीड़ का उत्साह बढ़ाने के लिए फिल्म के कुछ संवाद भी लोगों के सामने प्रस्तुत किए थे।