तत्काल अधिकारियों के निर्देश पर जांच कराते हुए देहली गेट में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसके आधार पर आरिफ को जेल भेज दिया गया। रुकैया आज भी लड़ रही है। हाईकोर्ट तक जमानत खारिज कराने के लिए वह गई है। वह चाहती है कि जब तक आरोपी को सजा नहीं मिलेगी। लड़ती रहेगी। मुकदमा आज भी न्यायालय में विचाराधीन है। अभी सितंबर 2025 में उसे हाईकोर्ट के निर्देश पर सरकार ने मुआवजा भी दिया है।
इस संबंध में जो भी निर्देश मिलेंगे उसके अनुसार विवरण इकट्ठा कर भेजा जाएगा। इन मुकदमों का क्या स्टेटस है इसकी जानकारी कराई जा रही है।-नीरज कुमार जादौन, एसएसपी, अलीगढ़
जिले में अकेली रुकैया नहीं, जिसे खुद पर एसिड हमले में सजा का इंतजार हो। इसी तरह जिले के चंडौस के गांव रामपुर शाहपुर की गुलशाना व उसके भाई अरमान पर 17 फरवरी 2019 को एसिड हमले की घटना हुई थी। ये दोनों जेल में निरुद्ध अपने पिता से मिलकर गांव पहुंचे थे, तभी विपक्षियों ने हमला किया था। इनको भी मुकदमे में सजा का इंतजार है। गुलशाना की तो इस घटना के बाद तबीयत भी ठीक नहीं रहती। इस विषय में शीरोज हैंगआउट कैफे से जुड़े आशीष बताते हैं कि हमारे स्तर से इन सभी मामलों में लगातार सजा कराने के प्रयास हो रहे हैं। लगातार हम लोग मॉनीटर करते हैं।
जिले में तीन वर्ष में 9 हमले दर्ज हुए, विचाराधीन
जिला पुलिस के रिकार्ड पर ध्यान दें तो जिले में पिछले तीन वर्ष में एसिड हमले के 9 प्रकरण दर्ज हुए हैं, जिनके मुकदमे अलग अलग अदालतों में लंबित हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के बाद उनका विवरण संकलित किया जा रहा है। मुकदमों में किस तरह की प्रक्रिया अब चल रही है। यह देखा जा रहा है। उसके अनुसार इनमें गति लाने का प्रयास होगा।