माइनर में कार पलटने के हादसे में मारे गए तीनों रिटायर दोस्त शताब्दी नगर में रहते थे। इनके घर एक-एक गली के अंतर पर थे। ये घर भी लगभग एक ही समय में खरीदे गए थे। घर आसपास होने की वजह से दोस्ती प्रगाढ़ थी और हर सुख दुख में साथ रहे। मोहल्ले के ही आशू ने बताया कि तीनों में बहुत गहरी मित्रता थी। इन सभी ने शताब्दी नगर में घर लगभग एक साथ बनाए। बच्चों को पढ़ा लिखा कर सम्पन्न बनाया। ये वक्त का तकाजा ही कहा जाएगा कि तीनों दोस्तों की दर्दनाक और दुखद मौत भी एक साथ ही हुई। पोस्टमार्टम के बाद तीनों के शव एक साथ घरों पर पहुंचे तो इलाके में कोहराम का माहौल बन गया। इनमें से बनवारी लाल व लाल सिंह के शवों का देर रात किशनपुर शमशान में अंतिम संस्कार कर दिया गया था, जबकि नंदन की बेटी के न आ पाने के कारण शव घर पर ही रखा था और रविवार सुबह अंतिम संस्कार किए जाने की तैयारी थी। इस दौरान विधायक अनिल पाराशर व पार्षद विजय तोमर मौजूद रहे।
1-बनवारी लाल (61 वर्ष) मूल निवासी नसैैराबाद थाना अकराबाद। वह केनरा बैंक के करेंसी चेस्ट से दो महीने पहले ही प्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हुए थे। परिवार में सबसे बड़ी बेटी रिचा का विवाह हो गया है। बेटा सुरेंद्र मेट्रो लखनऊ में कार्यरत हैं। दूसरा बेटा सुनील फरीदाबाद में प्राइवेट सेक्टर में कार्यरत है। पत्नी भुवनेश गृहणी हैं।
2-लाल सिंह (60 वर्ष) मूल निवासी रघुपुरा थाना बरला के थे। केनरा बैंक के करेंसी चेस्ट से प्रबंधक पद से छह महीने पहले सेवानिवृत्त हुए थे। बेटी शालिनी अलीगढ़ से बाहर प्राइवेट सेक्टर में कार्यरत है। बेटा उपेंद्र आईआईटी पटना में पढ़ रहा है। पत्नी मिथलेश गृहणी हैं।
3-नंदन सिंह अधिकारी (61 वर्ष) मूल रूप से अल्मोड़ा उत्तराखंड के निवासी थे। ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त से प्रबंधक पद से चार महीने से पहले सेवानिवृत्त हुए हैं। वह पूर्व में तकीपुर शाखा में भी तैनात रहे। इनकी बड़ी बेटी दीप्ती का विवाह हो चुका है। बेटा पंकज अधिकारी जयपुर में प्रोफेशनल स्टडी कर रहा है। पत्नी मधु गृहणी हैं।
बनवारी को बेटे की शादी में मिली थी कार
करीब एक साल पहले बनवारी लाल के छोटे बेटे सुनील की शादी में स्विफ्ट कार मिली थी। कार आने के बाद तीनों का सुबह का टहलना और ड्राइविंग करना शुरू हो गया था। पिछले कई वर्षों से तीनों एक साथ टहलने जा रहे थे। कार आने के बाद कार चलाना भी सीख रहे थे। ये भी तालानगरी और पीएसी की ओर से आते थे तो कभी एटा चुंगी की ओर निकल जाते थे। तीनों दोस्त गाड़ी चलाते थे। इसी के तहत शनिवार को भी सुबह साढ़े सात बजे घर से निकले थे, लेकिन उनको इसका जरा सा भी अहसास नहीं था कि अब वो वापस लौट कर नहीं आएंगे।
बेटा बेटियों को बुलाया गया
कार माइनर में पलटने की खबर जब तीनों दोस्तों के घर में पहुंची तो वहां चीखपुकार मच गई। घर वाले दौड़ भाग कर माइनर पर आए। आनन-फानन उनके बच्चों को भी फोन किया। बच्चों ने भी तुरंत पहुंचने की बात। कुछ बच्चे शाम तक अलीगढ़ आ भी गए। इनमें से एक की बेटी शिमला घूमने गई थी, जबकि एक का बेटा मुंबई में था। इनके घर से लेकर मोहल्ले तक इस घटना का मातम था और लोगों में माइनर को लेकर बहुत नाराजगी थी। वर्षों बाद भी इस मौत के माइनर को पाटा नहीं गया है।
मौत का माइनर, जाम लगाने का बना मन, समझाया
कभी सड़क हादसा तो कभी माइनर लोगों की जान ले रहा है। स्थानीय लोग इस बात से खासे नाराज हैं। ये सभी कई वर्षों से इस निष्प्रयोज्य माइनर को पाट कर बाईपास चौड़ा करने की मांग कर रहे हैं लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। जिससे लोग बहुत नाराज हैं। पास में ही गोविंद नगर कालोनी हर वर्ष बरसात के मौसम में इसी माइनर के पानी के कारण डूब जाती है। लोगों को अपने घरों से पलायन करना पड़ता है। वहां नाव तक चलानी पड़ जाती है क्योंकि वह कालोनी माइनर से काफी नीचे बसी है। इसे लेकर कुछ लोगों ने जाम लगाने की बात कही। मगर संभ्रांत लोगों ने समझाकर मामला शांत करा दिया।
डिप्टी सीएम तक पहुंचा मामला, होगी कार्रवाई :अनिल पाराशर
ऐसा भी नहीं है कि इस माइनर को पाटने का कोई प्रयास नहीं हुआ है। स्थानीय कोल विधायक अनिल पाराशर ने वर्ष 2018 से इसका प्रयास शुरू किया, लेकिन दो वर्ष बाद भी कोई काम शुरू नहीं हुआ है। अब इस हादसे के बाद उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य तक इसकी शिकायत की है। करीब 13 किमी के बाईपास के चौड़ी करण, नाला निर्माण, सेफ्टी गार्ड बनवाने का पत्र उन्होंने डीएम से लेकर शासन तक में लिखा है। उन्होंने कहा है कि ये सड़क पीडब्ल्यूडी बनाती है। टेंडर में माइनर या नहर से सट कर गुजरने वाली सड़क में रोड साइड सेफ्टी गार्ड बनाना होता है, लेकिन यहां पर ये नहीं बन रहा है। एटा चुंगी तक इसकी फेंसिंग भी नहीं हुई है। उस समय पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव के सामने भी मुद्दा रखा गया जब वो नुमाइश का शुभारंभ करने आए। उनसे कहा गया कि इसको कुछ पाट कर संकरा कर दिया जाए, जिससे जलनिकासी भी होती रही और सड़क भी चौड़ी हो जाए। घटनास्थल पर पहुंचे विधायक राहत और बचाव कार्य कराने के बाद अस्पताल और फिर पोस्टमार्टम भी पहुंचे। इसके बाद वह मंडलायुक्त जीएस प्रियदर्शी के पास पहुंचे और पूरा मामला बता कर पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने को कहा। जिस पर उन्होंने जांच कराने और कार्रवाई करने को कहा। साथ में कहा कि जब सड़क निर्माण का काम हुआ है तो सेफ्टी गार्ड क्यों नहीं बने। इधर, इलाके के पार्षद विजय तोमर ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर इस माइनर को पाट कर कम चौड़ा करने और सड़क पर सेफ्टी गार्ड लगाने की मांग की है।
देश के टॉप-10 एक्सीडेंट प्वाइंट में सुमार था कयामपुर मोड़
बात ज्यादा नहीं, करीब पांच साल पुरानी है। जब नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो ने अपना आंकड़ा जारी किया तो इस बाईपास पर शनिवार सुबह हुए घटना स्थल से चंद कदम की दूरी पर मौजूद कयामपुर मोड़ देश के टॉप-10 एक्सीडेंट प्वाइंटों में शामिल किया था। इसके बाद यहां एनएचएआई से लेकर पीडब्ल्यूडी तक ने तमाम सेफ्टी गार्ड कयामपुर मोड़ पर बनवाए। इसके बाद अब सब ज्यों का त्यों हो गया है।
शताब्दी नगर मोड़ पर अवैध कब्जे भी कम दोषी नहीं
पूरे बाईपास पर क्वार्सी से लेकर कयामपुर मोड़ तक यही एक जगह ऐसी है, जहां शताब्दी नगर के बाहर मुख्य मोड़ पर व दूसरे मोड़ पर तीन खोखे अवैध कब्जों के रूप में लगे हैं। अंदर से अगर कोई बाहर बाईपास पर आ रहा है तो उसे और बाहर से कोई अंदर गली में जा रहा है तो उसे मोड़ पर सामने वाला दिखता नहीं है। इन्हें हटाने की दिशा में किसी ने कोई कदम कभी नहीं उठाया।
क्वार्सी बाइपास पर नाले में कार गिरने से हुयी रिटयर्ड बैंककर्मी लाल सिंह की मौत के बाद विलाप करती- फोटो : CITY OFFICE