अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) ने मिर्च को सड़न से बचाने के लिए नया फॉर्मूला खोज लिया है। अक्सर राइजोक्टोनिया सोलानी नामक फंगस की चपेट में आने से मिर्च की जड़ें सड़ने लगती हैं और धीरे धीरे फसल प्रभावित होने लगती है।
एएमयू के वनस्पति विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने किसानों को इस नुकसान से बचाने के लिए अनोखा जैविक उपाय खोजा है। आसान भाषा में कहें तो खराब फंगस से मिर्च को बचने के लिए शोधकर्ताओं ने अच्छा यानी एक लाभकारी फंगस तैयार किया है जिसकी तीखी काट से सड़न की गंभीरता दर 52 फीसदी तक कम हुई। बीते 10 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय जर्नल वेजिटोस में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ।
शोधकर्ता प्रो. डॉ. रोज रिजवी ने बताया कि इस अध्ययन में ट्राइकोडर्मा विरेंस नामक फंगस का इस्तेमाल किया गया जिसे सामान्य तौर पर अच्छे या फिर लाभकारी फंगस के रूप में पहचाना जाता है। प्रयोगशाला परीक्षण में परिणाम उनकी उम्मीद से कहीं अधिक बेहतर मिले। परीक्षण में न सिर्फ सड़न, बल्कि बीज के अंकुरण, पौधे की वृद्धि और फल संख्या पर भी देखने को मिली। साथ ही मिर्च में सड़न की गंभीरता दर 51.53 प्रतिशत तक कम हुई। इसी तरह बीजों पर परीक्षण में पाया कि 86.67 प्रतिशत बीजों का अंकुरण हुआ और जड़ व तने की वृद्धि भी बेहतर रही।
किसानों के लिए क्यों अहम : मिर्च की जड़ में सड़न होने पर पौधा मिट्टी से पोषक तत्व ठीक से नहीं ले पाता और धीरे-धीरे कमजोर होकर सूख सकता है। ऐसे में अध्ययन में सामने आया लाभकारी फंगस रोग पैदा करने वाले फंगस को नियंत्रित करने के जैविक विकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देता है। हालांकि, इसे बड़े पैमाने पर किसानों के खेतों में अपनाने से पहले व्यावहारिक स्तर पर इसके उपयोग और प्रभाव का मूल्यांकन जरूरी होगा।