पानी की दस-बीस बूंदों से सीटीएस के जरिये नदी, नहर, तालाब और स्वीमिंग पूल के पानी की सेहत जानी जा सकती है कि वह कितनी खराब है। यह शोध इंटरनेशनल जर्नल एसीएस ओमेगा, जर्नल ऑफ केमेस्ट्री में छप चुका है। पानी में मिलने वाले खतरनाक तत्व सीटीसी केमिकल रासायनिक अभिक्रिया से अलग-अलग में नजर आएंगे। पानी के तत्व की पहचान में यूवी-विजिबल स्पेक्ट्रो फोटो मीटर का भी सहारा लिया जाता है।
पानी की सेहत खराब कर रहे खतरनाक तत्वों की पहचान सीटीसी से हो जाएगी। यह शोध में सामने आया है। प्रयोगशाला में सीटीसी की खोज की है। इसके सहारे किसी भी नदी, नहर, तालाब के पानी की सेहत को आसानी से जान सकते हैं। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। इस शोध में शोधकर्ता फरहा नाज की भी भूमिका रही है।-डॉ. इशात मोहम्मद खान, एसोसिएट प्रोफेसर, रसायन विभाग, एएमयू
सीटीसी और कोबाल्ट के अभिक्रिया से नीला रंग होगा। सीटीसी और निकिल के अभिक्रिया से हल्का पीला रंग होगा। सीटीसी और आयन के अभिक्रिया से भूरा रंग होगा।
क्या है सीटी कांप्लेक्स
डॉ. इशात खान ने बताया कि सीटी कांप्लेक्स एक तरह का केमिकल है, जो प्रयोगशाला में अलग-अलग केमिकल को अभिक्रिया कराकर नए रूप में केमिकल को तैयार किया गया है, जिसे सीटी कांप्लेक्स नाम दिया गया है। इस कांप्लेक्स के जरिये पानी में मिलने वाले खतरनाक तत्वों की आसानी से पहचान हो जाती है। शोध के अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल में छप चुका है।
नदियों के पानी की शुद्धता जांच सकेंगे
नदियों में हानिकारक और घातक तत्वों की जांच के लिए भी यह रसायन यानी सीटी कांप्लेक्स कारगर साबित होगा। इसकी मदद से नदियों के पानी की जांच की जा सकेगी। इस रसायन की मदद से कम से कम खर्च में नदियों के पानी की जांच हो सकेगी। अभी तक नदियों के पानी की जांच करने में बड़ा खर्च होता था।