ऐतिहासिक जामा मस्जिद की दीवार में दरारें आ गई हैं। दरार के चलते लोगों के माथे पर परेशानी की सिलवटें उभर आई हैं। दरअसल, सफेद गुंबद और नक्काशी खंभे बरबस अपनी ओर खींचते हैं, जो शिल्पकला का अद्भुत नमूना है। देश की संभवत: यह पहली मस्जिद होगी, जहां शहीदों की कब्रें भी हैं।
महानगर के ऊपरकोट इलाके में स्थित इस जामा मस्जिद की एक अलग पहचान है। मुगलकाल में मोहम्मद शाह के शासन काल में कोल के गवर्नर साबित खान ने वर्ष 1724 में मस्जिद की तामीर शुरू कराई थी। मस्जिद को मुकम्मल होने में चार साल लगे। वर्ष 1728 में तैयार मस्जिद में 17 गुंबद हैं, जिनमें करीब पांच हजार लोग नमाज पढ़ सकते हैं। मस्जिद में तीन बुलंद दरवाजे हैं। इन दरवाजों पर दो-दो गुंबद है।
गुंबद में लगा है सोना
सिने अभिनेता अमिताभ बच्चन ने ‘कौन बनेगा करोड़पति’ क्विज शो में एशिया में सबसे ज्यादा सोना लगे होने का सवाल किया था, जिसका जवाब कोई नहीं दे पाया था। फिर अमिताभ बच्चन ने खुद उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की जामा मस्जिद में सोना लगा होने का जवाब दिया था। हालांकि, इन गुंबद में कितना सोना लगा है, इसकी सटीक जानकारी किसी के पास नहीं है। सोना लगा होने की पुष्टि जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी भी कर चुकी है।
मस्जिद परिसर में हैं 73 शहीदों की कब्रें
जामा मस्जिद में 1857 गदर के 73 शहीदों की कब्रें भी हैं। मस्जिद परिसर में शहीदों की कब्र के चलते इसे गंज-ए-शहीदान (शहीदों की बस्ती) भी कहते हैं। 290 साल पुरानी मस्जिद में एक अनुमान के मुताबिक आठवीं पीढ़ी नमाज पढ़ रही है।
जामा मस्जिद ऐतिहासिक मस्जिद है। यह मस्जिद 290 साल पुरानी है। इस मस्जिद की देखभाल करने की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है। जामा मस्जिद के पास पड़ी भूमिगत पाइप लाइन भी दिक्कत पैदा कर रही है। इससे दरारें पड़ रही हैं।
- गुलजार अहमद, समाजसेवी।
जामा मस्जिद की दीवार में आई दरार परेशानी का सबब है। वैसे मस्जिद की देखभाल इंतजामिया कमेटी कर रही है। फिर भी पुरातत्व विभाग को इस ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर संजीदा होना पड़ेगा। दीवारों में दरारें आने की वजह तलाशनी होगी।
-मोहम्मद खालिद हमीद, शहर मुफ्ती