अलीगढ़। रक्षाबंधन के बाद रोडवेज विभाग दिवाली पर भी रिकार्ड बनाने की ओर बढ़ रहा है। अकेले दीवाली वाले दिन रोडवेज ने 97 लाख रुपये की कमाई की है। धनतेरस और छोटी दिवाली पर भी रोडवेज का खजाना चकाचक रहा। भाई दौज के चलते शुक्रवार को भी खासी भीड़ रही। आरएम आरिफ सकलैन ने बताया कि 23 अक्तूबर को रोडवेज ने 97 लाख रुपये कमाए हैं। जबकि पिछले वर्ष 74 लाख रुपये की इनकम हुई थी। धनतेरस वाले दिन 62 और छोटी दिवाली वाले दिन रोडवेज ने 68 लाख रुपये कमाए हैं।
जबकि दिवाली वाले दिन एक करोड़, दो लाख रुपये कमाकर गाजियाबाद अभी तक पहले नंबर पर है। लेकिन अभी भाई दौज का दिन बाकी है। रक्षाबंधन पर एक करोड़ से अधिक कमाई कर अलीगढ़ रोडवेज प्रदेश में पहले नंबर पर रहा था। आम दिनों में रोडवेज की कमाई 40 से 45 लाख रुपये प्रतिदिन की होती है। आरएम का कहना है कि अलीगढ़ क्षेत्र में करीब सौ परिचालकों की कमी चल रही है। अगर ऐसे में स्टाफ पूरा होता तो दिवाली की कमाई का आंकड़ा कुछ और ही होता।
एक दिन पहले निकली भाई दौज की भीड़
गोवर्धन पूजा वाले दिन आमतौर पर भीड़भाड़ दिखाई नहीं देती है। लोग घर और मोहल्ले- कॉलोनी में गोवर्धन पूजा करते हैं। लेकिन इस बार नया चलन देखने में आ रहा है। भाई दौज वाले दिन बस, ऑटो और ट्रेनों की भीड़भाड़ से बचने के लिए एक दिन पहले ही भीड़भाड़ सड़क पर दिखाई दे रही है। बसों में भी खासी भीड़ दिखाई दे रही है। आरएम आरिफ सकलैन ने बताया कि भीड़ को देखते हुए पिछले वर्षों की तुलना में हमें इस बार गोवर्धन पूजा वाले दिन अधिक बसें संचालित करनी पड़ी हैं।
कानपुर जाने वाली ट्रेनों में रही भीड़
दिल्ली से कानपुर जाने वाली ट्रेनों में शुक्रवार को भीड़ थी। कानपुर जाने वाली ईएमयू ट्रेन के डिब्बों में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। यात्री डिब्बे की छतों पर भी बैठे हुए थे। एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों में भी पूरी तरह से पैक थी, सीटों के लिए यात्री आपस में ही धक्का-मुक्की कर रहे थे। डिब्बे की खिड़की सामान फेंककर सीट घेरने की कोशिश कर रहे थे। दरवाजों तक पर यात्री लटके हुए थे। सबसे ज्यादा परेशानी का सामना महिला और बुजुर्ग यात्रियों को करना पड़ रहा था। जबकि दिल्ली की ओर जाने वाली अधिकांश ट्रेनाें में भीड़ नहीं थी।