अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कालेज के नाले में वैक्टीरिया एनडीएम -4 (सुपरबग) की खोज अंत: विषयी जैव प्रौद्योगिकी इकाई के समन्वयक डॉ. असद उल्लाह खान ने टीम के साथ किया था। यह वैक्टीरिया मुल्क में अन्य किसी शहर में भी मिल सकता है। इसके लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जाने की जरूरत है। वैज्ञानिक डॉ. असद उल्लाह खान का कहना है कि इस पर व्यापक स्तर से काम कराने की जरूरत है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय मल्टी सेंटर्ड ज्वाइंट प्रोजेक्ट के अंतर्गत सुपर बग की पहचान पर कार्य करा सकती है। इससे यह पता चलेगा कि हमारे देश में क्या स्थिति है? और नियंत्रण के लिए क्या उपाए किए जा सकते हैं। यूरोपीय देशों में इस तरह के प्रोजेक्ट पर बहुत काम होते है। डॉ. असद ने बताया कि पिछले दिनों लखनऊ से एक टीम उनके पास आई थी। एनडीएम -4 मिलने से घबराने की जरूरत नहीं है। जरूरत इस बात की है कि सरकार कोई नीति बनाए ताकि एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक सेवन को रोका जा सके। एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक सेवन से यह वैक्टीरिया फैलता है। चिकित्सा जगत के लिए यह बड़ी चुनौती है। उल्लेखनीय है कि डॉ. असद भारत में एनडीएम -4 की खोज करने वाले पहले वैज्ञानिक हैं। इस शोध का प्रकाशन ब्रिटेन के जर्नल मेडिकल माइक्रो बायोलॉजी के जुलाई अंक में प्रकाशित किया गया है।
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