अलीगढ़। स्नेह के पावन पर्व रक्षा बंधन पर बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। जो भाई बहन शहर में और आस-पास थे वह राखी बंधवाने एक दूसरे के घर आ गए। जो दूर थे उनके लिए डाक विभाग ने राखी पहुंचाने का काम किया। बाजार बंद रहे, फिर भी जीटी रोड सहित कई मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति रही। चाय-पान और खाद्य सामग्री तक के स्टाल बंद रहे। केवल खुली रही थीं तो मिठाई की दुकानें जिन पर मिठाई का स्टॉक अपने अंतिम चरण में था। शहर के दोनों बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर आवाजाही के चलते भीड़ का आलम रहा। जान जोखिम में डाल कर ट्रेन और बसों की छतों पर बैठकर यात्रा करनी पड़ी। गांधी पार्क बस स्टैंड से मसूदाबाद चौराहे तक एक सवारी के रिक्शे वाले आमतौर पर 5 रुपये किराया है। लेकिन रविवार को 10 रुपये तक वसूले गए। गंतव्य तक पहुंचने की जल्दी थी इसलिए देने में गुरेज भी नहीं किया गया।
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इन राखियों को न मिली कलाई
डाक विभाग के लाख दावों के बाद भी राखी के सैकड़ों ऐसे लिफाफे रहे जो वितरित नहीं हो सके या जहां पहुंचने थे नहीं पहुंच सके। हालांकि विभागीय अधिकारी इसके लिए कह रहे हैं कि यह वह लिफाफे हैं जो एक या दो दिन पहले ही पोस्ट किए गए हैं। विभाग का दावा है कि इस बार राखी वितरण के लिए न सिर्फ विशेष लिफाफे तैयार कराए थे बल्कि वितरण के लिए भी खास व्यवस्थाएं की थीं।
बच्चों ने लिया मेले का आनंद
अचलताल पर लगने वाले मेले में बच्चों ने जमकर आनंद उठाया। रक्षा बंधन पर यहां वर्षों से मेला लगता आ रहा है। आसपास के महिला-पुरुष बच्चों के साथ मेला देखने पहुंचे। खिलौने की दुकानों पर बच्चों की भीड़ लगी रही। झूले का भी बच्चों ने खूब आनंद लिया।
दूध की किल्लत बनी परेशानी
जैसी की आशंका थी वही हुआ। रक्षाबंधन को लेकर मांग में जबरदस्त उछाल से शहर में दूध की किल्लत पैदा हो गई। अन्य दिनों की तुलना में पैक्ड दूध की भी आपूर्ति कम हुई। इससे उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ गई। दूध के लिए ग्राहक 2-3 किलोमीटर के क्षेत्र में चक्कर लगाते रहे।
कितने दूध की है डिमांड और सप्लाई
- अलीगढ़ में 4 लाख लीटर दूध की रोजाना डिमांड
- करीब 2.50 लाख लीटर की ही होती है आपूर्ति
- शेष मांग पैक्ड दूध, स्किम्ड मिल्क आदि से पूरी होती है
- त्योहार के मौके पर 6 लाख लीटर तक पहुंच जाती है डिमांड
(स्रोत: पुराने हलवाई और दूध कारोबारियों से बातचीत के आधार पर, अनुमानित)