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विकास भवन में पकड़ा गया शातिर

Fri, 18 Jul 2014 05:30 AM IST
Aligarh
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अलीगढ़। जनपद में फ र्जी नियुक्ति पत्र जारी कर युवाओं को लूटने वाला गैंग सक्रिय है। विकास भवन के अधिकारियों ने गुरुवार को इस काम में संलिप्त एक युवक को पुलिस के हवाले कर दिया। पीड़ितों की तहरीर पर उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपी के पास से कई बेरोजगारों के फोटो और फर्जी नियुक्ति पत्र भी बरामद हुए हैं। वह तीन महीने से युवकों को झांसा दे रहा था। गुरुवार को पीड़ित नौकरी की हकीकत जानने के लिए उसे विकास भवन लेकर आए तो शातिर का भांडा फूट गया।
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डोरीनगर के राजू हरदुआगंज के देवराज और जटपुरा के मदन विकास भवन पहुंचे। तीनों युवकों पास संविदा पर चतुर्थश्रेणी के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी के हस्ताक्षरयुक्त एक नियुक्ति पत्र था। जो कि उन्हें सुशील निवासी जटपुरा ने दिया था। डीपीओ एमजेड खान और जिला विकलांग कल्याण अधिकारी भूपेंद्र कुमार ने लैटर देखते ही से फर्जी करार दे दिया। राजू, देवराज और मदन ने उनको बताया कि नियुक्ति के लिए सुशील ने तीनों से 63 हजार रुपये लिए हैं। वह तीन महीने से काम भी करा रहा था। वेतन को लेकर जब उससे बात की जाती तो हर बार कभी किसी अधिकारी के न होने के कारण वेतन रुकने का बहाना बना देता। शक होने पर तीनों युवक अधिकारी से मिलवाने के बहाने से सुशील को साथ लेकर विकास भवन पहुंचे तो उसकी पोल खुल गई। आरोपी युवक को सीडीओ शैलेंद्र सिंह के पास ले जाया गया। सीडीओ ने क्वार्सी पुलिस को बुलवाकर उसकी गिरफ्तारी के आदेश दिए। दूसरी ओर थाना प्रभारी क्वारसी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 467 468 व 471 के तहत देवराज की तहरीर पर सुशील के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया है।

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दोस्त के दगा से प्राइवेट नौकरी भी गई
चेहरे से सीधा सा नजर आने वाला सुशील बड़ा ही शातिर है। देवराज ने बताया कि आरोपी उसका सहपाठी रहा है। इस कारण उस पर आसानी से विश्वास कर लिया। सुशील ने राजू से 15 हजार, मदन से 12 हजार रुपये ठगे लेकिन दोस्त देवराज से 36 हजार रुपये ऐंठ लिए। देवराज और राजू हिंदुस्तान लीवर कंपनी में छह-छह हजार की नौकरी कर रहे थे। मदन एटूजेड में काम कर रहा था। फर्जी नियुक्ति पत्र को सच मानकर वह तीन महीने से काम भी कर रहे थे। सुशील जो कहता वह काम करते। संविदा पर सरकारी नौकरी के चक्कर में उनकी प्राइवेट नौकरी भी चली गई। अब वह बेरोजगार हैं।
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कौन हैं राहुल और जितेंद्र?
नियुक्ति पत्र में पत्रांक से लेकर शासन की मुहर की नकल की गई थी। प्रतिदिन का मानदेय और दायित्व तक का जिक्र था। फर्जी नियुक्त पत्र के आधार पर नौकरी दिलाने में पकड़ा गया सुशील तो एक कड़ी भर है। पुलिस तह तक जाए तो पूरे गिरोह का खुलासा हो सकता है। जिला विकलांग कल्याण अधिकारी के कार्यालय से पुलिस जब उसे गिरफ्तार कर रही थी तो सुशील का कहना था कि धौरी अकराबाद के राहुल और जितेंद्र यहां अधिकारियों से पीड़ितों को मिलवाने वाले थे। फर्जी नियुक्ति पत्र में तैनाती कलेक्ट्रेट में बताई गई है तो आरोपी युवकों को विकास भवन क्यों लेकर आया था। कहीं ऐसा तो नहीं कि सरगना का जुड़ाव विकास भवन से ही हो।
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वर्जन
दो लड़के मेरे पास आए थे, उन्होंने बताया था कि नौकरी के नाम पर उनके साथ ठगी हुई है मैने आरोपी को पुलिस के हवाले कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
- शैलेंद्र कुमार, सीडीओ
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