अलीगढ़। सोशल आर्गेनाइजेशन लोकसभा चुनावी रण में भाग्य अजमा रहे प्रत्याशियों के निशाने पर हैं। इनके माध्यम से विभिन्न समाजों में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिशें हो रही हैं। माध्यम बने हैं समाज के प्रमुख पदाधिकारी एवं झंडाबरदार। लोकसभा चुनावों का फाइनल जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे प्रत्याशियों के दिलों की धड़कने तेज होती जा रही हैं। चुनावी रण फतेह करने के लिए प्रत्याशी तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। वर्तमान में जनपद के सोशल आर्गेनाइजेशन प्रत्याशियों के निशाने पर हैं। प्रत्याशी इनके माध्यम से पूरे समाज की नब्ज टटोलने का प्रयास कर रहे हैं। माध्यम बने हुए हैं संगठनों के झंडाबरदार एवं पदाधिकारीगण। हर प्रत्याशी इन चुनिंदा लोगों के प्रभाव का इस्तेमाल करने को आतुर नजर आ रहा है। इन्हें अपने बैनरतले लाने के लिए प्रत्याशी हर हथकंडा अपना रहे हैं। मसलन गुप्त मीटिंगें की जा रही हैं तो इनके प्रतिष्ठान, आवास अथवा अन्य मौजूदगी वाले स्थलों पर पहुंचकर उन्हें प्रभाव में लेने की कोशिश की जा रही है।