अलीगढ़। बेमौसम बारिश ने किसानों को बर्बाद कर दिया है। आलू सड़ने की कगार पर है। गेहूं और सरसों की फसल में भी भारी नुकसान हुआ है। इधर गेहूं की बालियां गीली तो हुई हैं वहीं तेज हवाओं ने बालियाें को गिरा दिया है। ऐसे में कटाई एवं थ्रेसिंग मूल्य भी बढ़ने की संभावना है। मौसम की मार से परेशान किसानों के चेहरे का रंग उड़ गया है। फरवरी माह में इंद्रदेव का कहर ने किसानों के इस बार फसल बेचकर अच्छा मुनाफा कमाने के अरमानों पर पानी फेर गया। लगातार वर्षा से आलू के जोहरों में पानी नहीं निकाला जा सका। इससे करीब 20 से 25 प्रतिशत आलू सड़ने के आसार हैं। गेहूं की पकी फसल भी खेतों में बिछ जाने से दाना गीला हो गया है। इसका असर कटाई एवं थ्रेसर कास्ट पर पड़ना तय है। जवां के किसान हेमराज एवं रामजीवन ने बताया कि दाना गीला होने से कटाई की कास्ट बढ़ जाएगी तो थ्रेसर वाला भी गीलेपन का हवाला देकर अधिक पैसे लेने से नहीं चूकेगा। क्वार्सी के पप्पू एवं सौदान ने बताया कि किसान थ्रेसर एवं कटाई तो अधिक दाम में भी करा लेगा। लेकिन बारिश से दाना पतला हो गया है। क्वालिटी खराब होने पर उसे दाम कम मिलेगा। अतरौली के श्योराज सिंह एवं कालीचरन कहते हैं कि सरसों की फसल तो पूरी तरह बर्बाद हो गई है। जनवरी में आंधी तूफान व बारिश तथा फरवरी में भी यही हाल होने से सरसों के पौधे में कुल्ले फूट गए हैं। ऐसे में पहले से पकी कलियों को पर्याप्त पोषण नहीं मिला है। चना एवं मसूर दाल समेत अन्य रबी की फसलों का हाल भी कमोबेश ऐसा ही है।