हरदुआगंज/अलीगढ़। जिस्म समूचा सड़ा हुआ है शल्य चिकित्सा कौन करे, कहां पर पट्टी बांधे कहां-कहां तक घाव भरे, भारत का आतंक नपुंसक सत्ता से यह कहता है, राजा अगर शिखंडी है तो मुल्क की रक्षा कौन करे। यह पंक्तियां हरदुआगंज में रुकमणि विहार केशव कुंज में आयोजित महाकवि नाथूराम शंकर शर्मा ‘शंकर’ स्मृति समारोह और कवि सम्मेलन में कवि और राज्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार आत्मप्रकाश शुक्ल ने कहीं। कवि सम्मेलन का शुभारंभ कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल त्रिलोकीनाथ चतुर्वेदी और इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सखाराम ने किया। इस अवसर पर नाथूराम शंकर शर्मा ‘शंकर’ की काव्यकृति ‘वैदिक गीतांजलि’ का लोकार्पण किया गया। इससे पहले महाकवि शंकर की प्रतिमा का अनावरण किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता जस्टिस सखाराम ने की और संचालन कवि शशिकांत ने किया।
कवि सम्मेलन में मथुरा से आए युवा कवि मनवीर सिंह ने उत्तराखंड में सैनिकों द्वारा लोगों की जान बचाने के बारे में कहा, गमों के बीच से जो छीनकर हर खुशी लाए, अंधेरा चीर के हिम्मत की दिल में रोशनी लाए, प्रलय भी निडर होकर लगा जी जान की बाजी, कि सैनिक मौत के मुंह से बचाकर जिंदगी लाए। पद्म अलबेला ने कहा कि खुला दरवाजा चाहे जब आजा-आजा, इन क्वांरों को मत मारो कि औसत और बढ़ेगा, फ्यूचर में कन्याओं का और अकाल पड़ेगा। इसलिए जन्म से पहले बेटी को मत मारो, देवदास तो मिलेंगे, लेकिन नहीं मिलेगी पारो। इसके अलावा शशिकांत, बलराम श्रीवास्तव और रमेश मुस्कान और चेतना शर्मा ने कविताएं पढ़ीं। महाकवि शंकर स्मारण समिति के अध्यक्ष देशराज सिंह ने कहा कि शंकर खड़ी बोली कविता के संस्थापक थे। उनकी कविताओं की हजारी प्रसाद द्विवेदी पद्मसिंह शर्मा और प्रेमचंद ने भी सराहना की है। इस मौके पर डॉ. वेद प्रकश अमिताभ, डॉ. राजेश कुमार, के के तिवारी, कुलदीप खिलाड़ीवाल, जीवन गोविला प्रदीप कुमार चौहान, राजेश कुमार मित्तल, नेकराम आदि थे।