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नेत्र रोग विशेषज्ञता में भारत को महारथ हासिल

Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
Aligarh
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अलीगढ़। भारत सरकार के नेत्र सलाहकार और एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ. आरवी आजाद का कहना है कि नेत्र रोग उपचार और विशेषज्ञता के मामले में भारत इतना आगे बढ़ चुका है कि वह दुनिया के किसी भी देश से मुकाबले की स्थिति में है। भारत की विकास दर 70 से 80 फीसदी तक पहुंच गई है। एएमयू के गांधी नेत्र चिकित्सालय में संचालित ऑप्थल्मोलॉजी इंस्टीट्यूट को रीजनल इंस्टीट्यूट बनाने के लिए प्रस्ताव मांगा गया है। डॉ. आजाद शनिवार को यहां गायत्री पैलेस में उत्तर प्रदेश स्टेट ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी की47 वीं वार्षिक कांफ्रेंस में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने आए थे। कांफ्रेंस से पूर्व पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि देशभर में चलाए जा रहे दृष्टिहीनता निवारण कार्यक्रम से मोतियाबिंद जो कि 1.9 प्रतिशत था, घटकर एक प्रतिशत पर आ गया है। वर्ष 2020 तक इसे 0.3 फीसदी तक लाने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि हमारे देश का एक नेत्र सर्जन एक साल में जितने आंखों के ऑपरेशन करता है, वही ऑपरेशन विदेशों के डॉक्टर दस साल में कर पाते हैं। उन्होंने 20 से 30 फीसदी स्कूली बच्चों की आंखों पर चश्मा लगने होने को गंभीर समस्या बताया। इसके पीछे तीन कारण गिनाए। इनमें बच्चों के चश्मा लगने के पीछे आनुवांशिक लक्षण, खराब खानपान और पढ़ाई बताया है। पढ़ाई का जो तरीका है, उससे बच्चों का बौद्धिक विकास तो हो रहा है लेकिन शारीरिक विकास नहीं। वर्तमान युग में कंप्यूटर से भी बच्चों की आंखें प्रभावित हो रही हैं। डॉ. आजाद का ध्यान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के अलीगढ़ दौरे में एएमयू के ऑप्थल्मोलॉजी इंस्टीट्यूट को रीजनल इंस्टीट्यूट बनाने की घोषणा की ओर आकर्षित किया तो उनका कहना है यह अच्छी बात है। देश में 19 रीजनल सेंटर चल रहे हैं। एएमयू से इसके लिए प्रस्ताव देने को कहा है। रीजनल इंस्टीट्यूट बनने से यहां बेहतर उपचार और अन्य सुविधा उपलब्ध हो सकेंगी।
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