न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़।
राजनीतिक विश्लेषक एवं समाज विज्ञानी प्रो. आनंद कुमार ने कहा कि इस बार का चुनाव ‘भाजपा जिताओ बनाम भाजपा हराओ’ होगा। एक कार्यक्रम के सिलसिले में यहां पहुंचे प्रो. आनंद कुमार ने खास बातचीत में कहा कि राजनीति में गठबंधन निर्माण घुमावदार प्रक्रिया है। इस समय जो गठबंधन हो रहा है, उसमें नेताओं की आत्मरक्षा की भावना है कि मिल कर चलेंगे तभी बचेंगे।
दूसरा कारण मतदाताओं का लगातार बढ़ता दबाव है। ताजा उदाहरण जातियों में बंटे किसानों की एकता है। चरण सिंह एवं शरद जोशी के जमाने में भी किसान इतनी मजबूती से नहीं खड़े हुए थे। तीसरा प्रमुख कारण कार्यक्रमों में निकटता है।
उन्होंने कहा कि कुछ सवालों पर विभिन्न दल अपनी पुरानी मान्यताओं को छोड़कर नए कार्यक्रम स्वीकार करने को उत्सुक दिख रहे हैं। जैसे कांग्रेस ने बीस साल के उदारीकरण के दौरान बढ़ती बेरोजगारी एवं घटती आमदनी के सच को कबूल करने से इंकार किया था, लेकिन आज कांग्रेस के अध्यक्ष कह रहे हैं कि वह न्यूनतम इन्कम गारंटी के लिए तैयार हैं।
उत्तर प्रदेश में बसपा एवं सपा पिछले बीस साल से परस्पर राजनीति के अंतर विरोधों का इस्तेमाल कर आगे बढ़ रहे थे। लेकिन आज उनको दिखाई पड़ रहा है कि राष्ट्रीय हित एवं क्षेत्रीय हित दोनों इस बात में हैं कि भाजपा को हराने के लिए एक आत्म संयमी गठबंधन बने। प्रो. आनंद ने कहा कि संकेतों से ऐसा लगता है कि एक टिकाऊ, कार्यक्रम आधारित एवं नेताओं के आत्म नियंत्रण पर आधारित मोर्चा उभर रहा है।
चुनाव में और अधिक ध्रुवीकरण हो सकता है। हालांकि यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि लोग एनडीए से इतने नाराज हैं कि हर हालत में उसे हरा ही देंगे।