न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससीएसटी एक्ट के प्रावधानों में संशोधन के विरोध में दलित संगठनों द्वारा दो अप्रैल को किए गए भारत बंद और उग्र आंदोलन के बाद सवर्ण संगठनों ने कथित रूप से दस अप्रैल मंगलवार आज भारत बंद का एलान किया था। इसको लेकर पुलिस, प्रशासन एवं खुफिया तंत्र एक दिन पूर्व खासा सतर्क रहा।
सवर्ण संगठनों के नेताओं से दिनभर कभी फोन पर तो कभी व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया गया तो उनकी पल पल की गतिविधियों की जानकारी जुटाई जाती रही। इस मामले में सोमवार शाम अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा समेत आधा दर्जन संगठनों की रामलीला मैदान में बैठक हुई। सवर्ण नेताओं ने एलान किया कि संगठन के प्रतिनिधि बंद नहीं बल्कि मंगलवार आज सुबह 11 बजे डीएम से मुलाकात कर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे।
संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष ठा. शैलेंद्र पाल सिंह ने कहा कि किसी भी सामाजिक संगठन का बंद नहीं है। हम कानून व्यवस्था हाथ में नहीं लेना चाहते हैं। हमारी मांग है कि दो अप्रैल को हुए आंदोलन और उस दौरान हुई अराजक गतिविधियों की जांच हो।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान रखा जाए। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा ने कहा कि सवर्ण संगठन किसी भी प्रकार की हिंसा या अराजक गतिविधि के पक्ष में नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट देश की उच्चतम कोर्ट है और उसके फैसले का किसी भी सूरत में सम्मान होना चाहिए।
हम पर प्रशासन व पुलिस रामलीला मैदान पर ही ज्ञापन देने का दबाव बना रही है, लेकिन सवर्ण संगठन इसे मानने को तैयार नहीं हैं। संगठनों के मात्र 20-25 पदाधिकारी कलक्ट्रेट जाकर डीएम को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे। इस मौके पर कमल प्रताप सिंह, विपिन सिंह राना, जेसी शर्मा, नंदराम पाठक, मनोज सिंह, संदीप जादौन, हिमांशु भारद्वाज, ललित, अभिषेक वार्ष्णेय, केबी दुबे समेत अग्रवाल महासभा, वैश्य महासभा, जाट महासभा, कायस्थ महासभा एवं सवर्ण दल के प्रतिनिधि मौजूद थे।