फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निराश होकर लौटी एड़्स पीड़िता

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
एड्स पीड़िता इलाज न मिलने पर मेडिकल कालेज से लौटी

ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।

एड्स पीड़ितों को मुफ्त और बेहतर इलाज देने के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत खोखली है। जेएन मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने आई एटा जनपद की एक एड्स पीड़िता पैसों के अभाव में मौत से जूझ रही है।

एक दिन यहां भर्ती रही महिला के पास खून की जांच कराने तक के लिए रुपये नहीं थे। इस कारण वह शुक्रवार को बिना इलाज कराए घर लौट गई। एटा जनपद के एक गांव निवासी महिला ने बताया कि उसके पति भी एचआईवी के मरीज थे।
विज्ञापन


उनकी एक साल पहले इलाज के अभाव में मौत हो गई। वह भी एड्स से पीड़ित है। चार बेटियाें, सबसे छोटे बेटे की परवरिश और अपने इलाज की जिम्मेदारी उसके ऊपर है।

गुरुवार को तबियत ज्यादा खराब होने पर वह दो बेटियों को साथ लेकर जेएन मेडिकल कॉलेज आई थी। डॉक्टरों ने उसे वार्ड संख्या 12 में भर्ती कर दिया।

डॉ. एसए खान की देखरेख में उसका इलाज शुरू हो गया। शुक्रवार सुबह डॉक्टर ने खून की कुछ जांचें लिखीं। वार्ड में एक कर्मी ब्लड सैंपल लेने आया।

उसने जांच का खर्चा 500 रुपये बताया। महिला के पास इतने रुपये भी नहीं थे। इस पर वह ब्लड का सैंपल बेटियाें को थमा गया। उसने 500 रुपये जमा कराने के बाद ही जांच करने की बात कही।

शुक्रवार होने के कारण स्टाफ भी जल्दी चला गया। ऐसे में मायूस पीड़िता दोनों बेटियों को लेकर अपने घर लौट गई।

एटा का कर्मी भी लेता था खर्चा-पानी
महिला ने बताया कि उसने एटा के जिला अस्पताल में भी इलाज कराया था। वहां से महीने में दो बार उसे दवा लेने के लिए अलीगढ़ भेजा जाता था। उसकी देखरेख के लिए साथ में एक अस्पताल कर्मी भी भेजा जाता था।
विज्ञापन


वह कर्मचारी 500 रुपये खर्चा और किराया महिला से लेता था। अब उसके पास इसके लिए भी रुपये नहीं है।


मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है और न ही कोई शिकायत आई है। गरीब लोगों के लिए नि:शुल्क जांच का प्रावधान है। यदि महिला फिर से आती है तो उसकी मदद की जाएगी।
प्रो. अमानउल्लाह खान, डीन एवं प्रभारी प्रिंसिपल जेएन मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें