अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में शिक्षा पाने के लिए भेज रहे अभिभावकों पर 2021-22 का सत्र फीस के लिहाज से महंगा पड़ने जा रहा है । जिला शुल्क नियामक समिति ने तय किया है कि 2021-22 के सत्र में विद्यालय संचालक 9.59 प्रतिशत की फीस बढ़ोतरी कर सकते हैं । ऐसे में अभिभावकों की जेब पर इसका भारी असर पड़ना तय है। जिला शुल्क नियामक समिति ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 2020 के आधार पर यह तय किया है।
बता दें कि कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के चलते बीते साल फीस वृद्धि नहीं की गई थी। जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक कलक्ट्रेट में बुधवार को जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह की अध्यक्षता में हुई। इसमें जिला शुल्क नियामक समिति के सदस्य सचिव डीआईओएस डॉ. धर्मेंद्र शर्मा, सदस्य अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड, सदस्य विशिष्ट कोषाधिकारी महिमा सिंह, जिलाधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में चार्टड अकाउंटेंट मनी गुप्ता, जिला अधिकारी द्वारा नामित सदस्य के रूप में प्रधानाचार्य अवर लेडी फातिमा, जिलाधिकारी द्वारा नामित अभिभावक चंद्र प्रकाश सहित सीबीएसई व आई सीएसई बोर्ड के लगभग 50 प्रधानाचायों ने प्रतिभाग किया गया। बैठक में शैक्षिक सत्र 2021- 22 की शुल्क निर्धारण पर चर्चा की गई। प्रधानाचार्यों द्वारा अनुरोध किया गया कि गत वर्ष कोविड-19 महामारी के कारण उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शैक्षिक सत्र 2020- 21 के लिए शुल्क वृद्धि को शून्य कर दिया था। इसके चलते विद्यालयों द्वारा गत वर्ष कोई भी शुल्क वृद्धि नहीं की गई। जिला विद्यालय निरीक्षक ने समिति को बताया कि बीते वर्ष समिति की बैठक में निर्णय लिया गया था कि शुल्क वृद्धि के आगणन के लिए प्रत्येक वर्ष दिसंबर का सीपीआई इंडेक्स यानी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मान्य होगा। दिसंबर 2020 का सीपीआई इंडेक्स 4.59 है। अधिनियम में यह व्यवस्था है कि विद्यालय सीपीआई इंडेक्स के प्लस पांच प्रतिशत तक अधिकतम अथवा शिक्षकों के वेतन में वृद्धि का प्रतिशत (जो भी कम हो) की सीमा तक शुल्क वृद्धि कर सकते हैं। इस पर बैठक में जिला शुल्क नियामक समिति के अध्यक्ष/ जिलाधिकारी द्वारा निर्णय लिया गया कि विद्यालय दिसंबर 2020 के सीपीआई इंडेक्स के प्लस 5 प्रतिशत तक अधिकतम शुल्क वृद्धि कर सकते हैं। दिसंबर 2020 का कंज्यूमर प्राइस 4.59 है। इस प्रकार विद्यालय 9.59 प्रतिशत तक अधिकतम शुल्क/फीस वृद्धि कर सकते हैं।
महंगाई के कारण घर की रसोई पर पहले से ही असर पड़ रहा है। अब बच्चों की स्कूल फीस में भी 10 प्रतिशत तक वृद्धि करने की छूट संचालकों को दे दी है। यह अभिभावकों की जेब पर बहुत बुरा असर डालेगी।
- अभिभावक गुंजन शर्मा, निवासी संजय कोलानी
कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के बाद से रोजगार पहले से ही मंदी का शिकार हुए पड़े हैं। घर चलाना मुश्किल हो रहा है। स्कूल संचालकों को फीस वृद्धि क रने की छूट दी जाती है। इस पर शहर में सर्वे कराकर अभिभावकों की भी राय जानी जाए।
- अभिभावक क्रियांश गांधी, निवासी महेंद्र नगर
लॉकडाउन में बच्चों की पढ़ाई बंद रही। बाद में सिर्फ ऑनलाइन क्लास संचालन किया गया। ऐेसे में विद्यालय संचालकों को ऐसा कौन सा बड़ा नुकसान हो गया जो इस वर्ष 10 प्रतिशत तक फीस बढ़ोतरी की छूट दी गई है।
- अभिभावक प्रांजुल अग्रवाल, निवासी गूलर रोड
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक जैसे हवा-हवाई इंडेक्स के आधार पर 10 प्रतिशत के करीब फीस वृद्धि करना गलत है। प्रशासन इस फैसले पर विचार करे। स्कूल की सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाए। सिर्फ अभिभावकों को ही गन्ने के समान न निचोड़ा जाए।
- अभिभावक चिराग वार्ष्णेय, निवासी रेलवे रोड